बिलासपुर कॉलेज में जेनरेटिव एआई पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। इसमें विद्यार्थियों और शिक्षकों को शैक्षणिक जीवन में एआई के सुरक्षित और प्रभावी उपयोग के तरीके बताए गए। कार्यशाला से शैक्षिक गतिविधियों में तकनीक की उपयोगिता स्पष्ट हुई।
तकनीक स्वयं अच्छी या खराब नहीं होती, उपयोग करने का तरीका होता है महत्वपूर्ण
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छात्र, शिक्षक दोनों के लिए शैक्षणिक कार्यों में मददगार हो रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बिलासपुर कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय जेनरेटिव एआई कार्यशाला का शुक्रवार को समापन हुआ। कार्यशाला के दूसरे और अंतिम दिन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.पीएस कटवाल बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के प्राध्यापक और छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
कार्यशाला में मुख्य वक्ता गौरव शर्मा ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को बताया कि जेनरेटिव एआई को दैनिक जीवन और शैक्षणिक कार्यों में कैसे उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने इसके संभावित नुकसान और सुरक्षित इस्तेमाल के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की। कार्यशाला के दूसरे दिन विद्यार्थियों और शिक्षकों को यह बताया गया कि एआई प्रेजेंटेशन, प्रोजेक्ट और असाइनमेंट तैयार करने में किस प्रकार मददगार साबित हो सकता है और रिसर्च के क्षेत्र में यह कैसे वरदान बन सकता है। प्राचार्य डॉ. पीएस कटवाल ने कहा कि बीसीए सेल्फ फाइनेंस के संयोजक डॉ. अश्विनी ने आधुनिक और प्रचलित विषय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर कार्यशाला आयोजित कर विद्यार्थियों के जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। एआई आज केवल मशीन लर्निंग नहीं रही, बल्कि यह गाने सुनने, घर और वाहन के ऑटोमैटिक लॉक तक में हमारी रोजमर्रा की ज़रूरत बन चुकी है। यह छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए शैक्षणिक कार्यों में मददगार साबित हो रही है। तकनीक स्वयं अच्छी या खराब नहीं होती, उपयोग करने का तरीका महत्वपूर्ण है।
संयोजक डॉ. अश्विनी ने प्राचार्य का धन्यवाद किया और कहा कि उनका मार्गदर्शन और सहयोग हमेशा प्रेरणादायक रहेगा। प्रो. तेज सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर उप प्राचार्य प्रो. प्रेमजीत, प्रो. रंजीत, डॉ. रितु शर्मा, डॉ. विजय, डॉ. नम्रता पठानिया, डॉ. जसवाल और डॉ. अंकुर शर्मा मुख्य रूप से उपस्थित रहे।