-95 फीसदी योजना तैयार, वन विभाग की मंजूरी का इंतजार
-दो साल से वन विभाग की मंजूरी न मिलने के कारण पूरा होने में देरी
-20 ग्राम पंचायतों के करीब 72 हजार लोगों को मिलना है योजना का लाभ
सुभाष कपिल
झंडूता(बिलासपुर)। झंडूता विधानसभा क्षेत्र में गोबिंद सागर झील पर बनने वाली 60 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी कुट बांगुड़ उठाऊ पेयजल योजना अब अंतिम चरण में है। योजना के पूरा होने से पहले जल शक्ति विभाग को वन विभाग से भूमि के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र का इंतजार है।
पिछले दो साल से यह प्रमाण पत्र न मिलने के कारण इसे पूरा करने में देरी हो रही है। एनओसी मिलने के बाद जल शक्ति विभाग इस योजना को चरणबद्ध तरीके से शुरू करने की योजना बना रहा है। इस पेयजल योजना का करीब 95 प्रतिशत कार्य पहले ही पूरा हो चुका है। विभाग के अधिकारी इसके बाकी काम को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए कार्य कर रहे हैं। जल शक्ति विभाग ने वन विभाग को वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) के तहत आवश्यक अनुमति के लिए फाइल भेज दी है, जैसे ही स्वीकृति मिलेगी वैसे ही योजना के काम को फिर से शुरू किया जाएगा। इस योजना का कार्य दो साल पहले लगभग पूरा हो चुका था, लेकिन वन विभाग ने जल शक्ति विभाग पर बिना अनुमति से काम करने का आरोप लगाते हुए कार्य को रोक दिया था। यह स्थिति तब उत्पन्न हुई जब योजना का 90 प्रतिशत कार्य लगभग पूरा हो चुका था। यह योजना क्षेत्र की 20 ग्राम पंचायतों के करीब 72 हजार लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, और इसके पूरा होने से इन लोगों को पीने के पानी की स्थायी सुविधा मिलेगी।
इनसेट
जल जीवन मिशन और नाबार्ड से मिला है बजट
यह योजना जल जीवन मिशन के तहत और नाबार्ड से मिली 37 करोड़ रुपये की राशि से विकसित हो रही है। योजना के तहत 23 करोड़ रुपये जल जीवन मिशन के तहत मिले हैं। योजना की शुरुआत 2020 में हुई थी, और इसके बाद यह काफी समय तक वन विभाग से संबंधित अनुमति की समस्याओं में उलझी रही।
कोट
वन विभाग द्वारा जमीनी विवाद को लेकर दिल्ली से स्वीकृति मिलने के बाद इस पेयजल योजना की पहली टेस्टिंग शुरू कर दी जाएगी। 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और जैसे ही अनुमति मिलती है, विभाग जल्दी से इस योजना की शुरुआत करेगा। - राकेश कुमार वैद्य, अधिशासी अभियंता, जल शक्ति विभाग, झंडूता
कोट
इस योजना के तहत बिजली आपूर्ति का कार्य भी पूरा हो चुका है। विद्युत बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक, इस योजना को बिजली आपूर्ति देने में चार करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं और यह कार्य अब समाप्त हो चुका है। योजना के लिए विद्युत कार्य में कोई रुकावट नहीं आई है और कार्य निर्धारित समय पर पूरा कर लिया गया है। - कर्ण चंदेल, अधिशासी अभियंता, विद्युत विभाग
संवाद