हर दिन 3700 भारतीयों की जान ले रहा तंबाकू
विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर विशेषज्ञों ने युवाओं को दी चेतावनी
ई-सिगरेट और फ्लेवरयुक्त उत्पादों की गिरफ्त में आ रहे बच्चे और किशोर
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। तंबाकू हर दिन हजारों लोगों की जान लेने वाला खतरा बन चुका है। ये अब बच्चों और किशोरों को निशाना बना रहा है। देश में प्रतिदिन करीब 3700 लोग तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण दम तोड़ रहे हैं। विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि तंबाकू उद्योग पारंपरिक सिगरेट से आगे बढ़कर ई-सिगरेट, निकोटीन पाउच और सिंथेटिक निकोटीन से युवाओं को लत की गिरफ्त में लेने की नई रणनीतियां अपना रहा है।
एम्स बिलासपुर के सामुदायिक एवं परिवार चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अनुपम पराशर ने बताया कि विश्व स्तर पर हर साल 80 लाख से अधिक लोगों की मौत तंबाकू सेवन से होती है। भारत में यह आंकड़ा करीब 13.5 लाख वार्षिक मौतों का है। उन्होंने कहा कि उद्योग अब आकर्षक पैकेजिंग, कैंडी और फलों के फ्लेवर, सोशल मीडिया प्रचार, ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म और प्रभावशाली हस्तियों के माध्यम से युवाओं को लुभाने का प्रयास कर रहा है।
डॉ. पराशर के अनुसार दुनिया भर में 13 से 15 वर्ष आयु वर्ग के लगभग चार करोड़ बच्चे किसी न किसी तंबाकू उत्पाद का उपयोग कर रहे हैं। इनमें करीब डेढ़ करोड़ किशोर ई-सिगरेट का सेवन करते हैं। कई देशों के अध्ययनों में सामने आया है कि बच्चे वयस्कों की तुलना में लगभग नौ गुना अधिक वेपिंग कर रहे हैं। शोध यह भी बताते हैं कि ई-सिगरेट का इस्तेमाल करने वाले युवाओं में बाद में सामान्य सिगरेट पीने की संभावना लगभग तीन गुना बढ़ जाती है।
तंबाकू शरीर के लगभग हर अंग को प्रभावित करता है। यह फेफड़ों, मुंह और गले के कैंसर के साथ-साथ सीओपीडी, हृदय रोग, स्ट्रोक, मधुमेह और तपेदिक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाता है। वहीं परोक्ष धूम्रपान के संपर्क में आने वाले लोगों में भी हृदय रोग और फेफड़ों के कैंसर का जोखिम 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। बच्चों में इससे फेफड़ों का संक्रमण, अस्थमा और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
तंबाकू नियंत्रण उपाय मजबूत करने की जरूरत
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सरकारों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों से नए निकोटीन उत्पादों पर कड़ी निगरानी रखने, युवाओं को लक्षित करने वाले विज्ञापनों और फ्लेवरयुक्त उत्पादों पर रोक लगाने तथा जागरूकता अभियानों को और व्यापक बनाने की अपील की है। उनका कहना है कि तंबाकू किसी भी रूप में सुरक्षित नहीं है और एक स्वस्थ, जागरूक तथा तंबाकू मुक्त समाज के निर्माण के लिए उद्योग की भ्रामक रणनीतियों को बेनकाब करना जरूरी है।