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नई पेंशन स्कीम का बहिष्कार, मनाया काला दिवस

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बिलासपुर। नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ हिमाचल प्रदेश ने 15 मई को हर वर्ष की भांति नई पेंशन स्कीम का बहिष्कार कर काला दिवस के रूप में मनाया। इस दौरान कर्मचारियों के इस विरोध को समूचे देश में सोशल मीडिया एवं ट्वीटर के माध्यम से सहयोग भी मिला। इस दौरान महासंघ ने पुरजोर तरीके से पुरानी पेंशन को पुन: बहाल करने की मांग उठाई। बता दें कि 15 मई 2003 से हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों की पेंशन बंद कर दी गई थी। तब से लोग इस दिन को ब्लैक डे के रूप में मनाते आ रहे हैं।
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संगठन के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर ने बताया कि इस वर्ष लॉकडाउन के चलते संगठन ने कानून को ध्यान में रखते हुए शुक्र्रवार को ब्लैक डे मनाया गया। जिसमें अधिकतर कर्मचारियों ने अपने घरों में ही काला रिबन बांधकर नई पेंशन प्रणाली का विरोध किया।
महासचिव भरत शर्मा ने कहा कि 15 मई कर्मचारियों के लिए वह दिन है जिस दिन कर्मचारियों की पुरानी पेंशन छीन ली गई और नई पेंशन के नाम पर कर्मचारियों तो एक धोखे की स्कीम दे दी गई । जिसमें कर्मचारियों को पेंशन के नाम पर उनके जमा पैसे का ब्याज मात्र ही मिलता है।
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प्रदीप ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है जहां 15 मई 2003 से पेंशन बंद है। देश के अन्य राज्य और केंद्र सरकार के कर्मचारियों की पेंशन 1 जनवरी 2004 या उसके बाद से बंद हुई है। वहीं पश्चिम बंगाल देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां के कर्मचारियों को पेंशन का प्रावधान अभी भी है।
प्रदीप ठाकुर ने कहा कि नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ कोरोना महामारी के समय प्रदेश सरकार के साथ खड़ा है। 6 मई को भी संगठन द्वारा सरकार को पुरानी पेंशन बहाली और केंद्र सरकार दिए गए लाभ जिसमें दिव्यांग एवं दिवंगत होने पर पुरानी पेंशन का लाभ कर्मचारियों को मिलता है संबंधित मांगपत्र मुख्यमंत्री को दिया गया था। हिमाचल सरकार कम से कम कर्मचारियों का और सरकार का जो पैसा कंपनी को दे रही है उस पैसे को अपने पास रखे और जल्द से जल्द मई 2009 की केंद्र सरकार की दिव्यांग एवं दिवंगत होने पर कर्मचारियों पुरानी पेंशन के प्रावधान की नोटिफिकेशन को तुरंत प्रभाव से हिमाचल प्रदेश में लागू करें।
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बताया कि संगठन के स्तर से 6 मई को सरकार को 23,53396 रुपये मुख्यमंत्री कोविड-19 राहत कोष के लिए भी सहायता के रूप में दिए गए।
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