प्रवासी कर रहे आदेशों की अवहेलना, सीर खड्ड में खुले में शौच
पेयजल योजनाओं के भी दूषित होने का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। नगर परिषद घुमारवीं को भले ही खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) का प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुका हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। प्रशासन द्वारा खुले में शौच पर पूर्ण रोक लगाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन शहर के सीर खड्ड किनारे प्रतिदिन प्रवासी लोगों को खुले में शौच करते देखा जा सकता है।
इस समस्या का मुख्य कारण यह है कि शहर में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर किराये पर रह रहे हैं। मकान मालिकों ने उन्हें किराए पर तो जगह दे दी है, लेकिन उनके लिए शौचालय की उचित व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में ये प्रवासी मजदूर व अन्य लोग मजबूरी में खड्ड किनारे खुले में शौच करने जाते हैं, जिससे क्षेत्र में स्वच्छता अभियान की धज्जियां उड़ रही हैं। इससे न केवल पर्यावरण को गंभीर क्षति हो रही है, बल्कि खड्ड का पानी भी दूषित हो रहा है, जिससे दर्जनों गांवों की पेयजल योजना प्रभावित हो रही है। जबकि खुले में शौच के खड्ड के पानी में मिलने से जल जनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। यह खड्ड न केवल घुमारवीं बल्कि आसपास के गांवों के लिए भी पेयजल का मुख्य स्रोत है। दूषित पानी के सेवन से डायरिया, पीलिया और अन्य संक्रामक रोग फैलने की संभावना बनी हुई है।
लोगों का कहना है कि नगर परिषद मकान मालिकों को निर्देश दे कि वे किरायेदारों के लिए शौचालय की व्यवस्था करें। इसके अलावा, सार्वजनिक शौचालयों की संख्या बढ़ाई जाए और उनकी नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए। प्रशासन को सख्ती से खुले में शौच करने वालों पर जुर्माना लगाना चाहिए, ताकि लोग स्वच्छता नियमों का पालन करें।
कोट
शहर में जिन लोगों ने भी कमरे किराए पर दिए हैं वह किरायेदारों के लिए शौचालय का प्रबंध करें अन्यथा उन पर कार्रवाई की जाएगी। स्वच्छ भारत मिशन को सफल बनाने के लिए नगर परिषद के साथ-साथ आम जनता की भी जिम्मेदारी बनती है। मकान मालिकों को चाहिए कि वे किराएदारों को पर्याप्त शौचालय सुविधा दें। वहीं प्रवासी मजदूरों को भी जागरूक होकर उपलब्ध शौचालयों का उपयोग करना चाहिए।
रीता सहगल, अध्यक्ष नगर परिषद घुमारवीं