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Bilaspur News: आंशिक मकानों के मुआवजे पर करोड़ों रुपये का घोटाला

Sun, 21 Jun 2026 11:34 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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सुंदरनगर-पंडोह फोरलेन परियोजना में करीब 300 स्ट्रक्चर आज भी मौके पर मौजूद
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भू-अर्जन प्रक्रिया और मकानों के अधिग्रहण को लेकर दस्तावेजों में कई विसंगतियां सामने आने का दावा

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सुंदरनगर-पंडोह फोरलेन परियोजना में आंशिक रूप से प्रभावित मकानों के मुआवजे पर सवाल उठे हैं। उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार करोड़ों रुपये का मुआवजा आवंटित किया गया। जबकि बड़ी संख्या में मकान आज भी मौके पर मौजूद हैं।
तत्कालीन परियोजना निदेशक ने क्षेत्रीय अधिकारी चंडीगढ़ के साथ बैठक की थी। उन्होंने निर्देश दिए थे कि मुआवजा आवंटन से पहले मकानों के ध्वस्त होने की पुष्टि हो। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने यह जानकारी दी। निदेशक ने अपने पत्राचार में माना था कि आंशिक तोड़फोड़ के बाद मकान रहने योग्य नहीं रहते। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राइट ऑफ वे के बाहर के भवन भी क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
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हालांकि, बाद में सैकड़ों आंशिक ढांचों का अधिग्रहण और मुआवजा आवंटित हुआ। सुंदरनगर से पंडोह तक लगभग 300 ढांचे अभी भी स्थल पर देखे जा सकते हैं। कई स्थानों पर राइट ऑफ वे के बाहर स्थित मकानों, पेड़ों और भूमि के लिए भी मुआवजा स्वीकृत हुआ। यह क्षेत्रमिति संबंधी प्रावधानों के विपरीत है। सरकारी भूमि पर मौजूद भवनों को भी मुआवजा सूची में शामिल करने के आरोप हैं।
अनियमितताओं के उदाहरण
बिलासपुर जिले के कई मौजों में आंशिक ढांचों के नाम पर मुआवजा दिया गया। बकरोआ में सरकारी भूमि पर स्थित एक मकान को निजी भूमि में दर्शाया गया। इसके लिए लगभग 24 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया। जबकि तहसीलदार घुमारवीं ने उसे ध्वस्त करने के निर्देश दिए थे। बागथेहड़ु, पनोह, रोहिन सहित कई अन्य स्थानों पर भी ऐसे मामले सामने आए हैं।
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जांच की मांग और रिकॉर्ड का अभाव
परियोजना निदेशक द्वारा भू-अर्जन अधिकारी और क्षेत्रीय अधिकारी चंडीगढ़ कार्यालय के निरीक्षण का कोई रिकॉर्ड नहीं है। आंशिक मकानों के लिए विशेष मुआवजा निर्देशों का मूल पत्र भी उपलब्ध नहीं है। 45 मीटर की विन्यास योजना में 25.30 मीटर चौड़ी सड़क प्रस्तावित थी। एनएचएआई के पास इसके बाहर भी पर्याप्त भूमि शेष थी। सरकार से अधिग्रहित चौड़ाई से बाहर के मकानों के अधिग्रहण की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
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