गुणवत्ता मानकों, हॉलमार्किंग, एमआरपी नियमों व उपभोक्ता अधिकारों की दी जानकारी
औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों ने लिया भाग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के परवाणू शाखा कार्यालय ने बुधवार को बिलासपुर में लाइसेंसधारी एवं गैर-लाइसेंसधारी उद्योगों के लिए एमएसएमई इंडस्ट्री मीट का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य उद्योगों और हितधारकों के बीच गुणवत्ता मानकों, मानकीकरण तथा प्रमाणित उत्पादों के महत्व को लेकर जागरूकता बढ़ाना रहा।
इसमें जिले के विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में जिला इंडस्ट्रियल एसोसिएशन बिलासपुर के महाप्रबंधक मनोज तथा लघु उद्योग संघ के महासचिव इंदर ठाकुर मुख्यातिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने उद्योगों के विकास में गुणवत्ता अनुपालन और मानकीकरण की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में उद्योगों को गुणवत्ता मानकों का पालन करना अनिवार्य है। बैठक के दौरान बीआईएस अधिकारियों ने भारतीय मानक ब्यूरो की ओर से निर्धारित गुणवत्ता मानकों और प्रमाणित उत्पादों के उपयोग के लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारतीय मानक (आईएस स्टैंडर्ड) न केवल उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हैं, बल्कि सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देते हैं। मानकों के अनुपालन से ऊर्जा दक्षता में वृद्धि, संसाधनों का संरक्षण, अपशिष्ट में कमी और पर्यावरण-अनुकूल विनिर्माण प्रक्रियाओं को प्रोत्साहन मिलता है।
बीआईएस के निदेशक एससी नायक और संयुक्त निदेशक शुभम तिवारी ने उद्योग प्रतिनिधियों को एमआरपी विनियमों, बीआईएस केयर एप, हॉलमार्किंग व्यवस्था, उपभोक्ता शिकायत निवारण प्रणाली तथा देश में उपभोक्ता आयोगों की भूमिका के बारे में जानकारी दी। उन्होंने उद्योगों को गुणवत्ता प्रमाणन और मानकीकरण की प्रक्रिया से जुड़ी आवश्यकताओं एवं लाभों से भी अवगत कराया। कार्यक्रम के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच संवादात्मक सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने गुणवत्ता प्रमाणन, मानकों के अनुपालन और औद्योगिक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने प्रश्न रखे। अधिकारियों ने इनका विस्तार से समाधान किया। गुणवत्ता आधारित औद्योगिक विकास पर बल कार्यक्रम के समापन अवसर पर उद्योगों में गुणवत्ता आधारित कार्य संस्कृति को मजबूत बनाने, सतत औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने और प्रमाणित और मानक अनुरूप उत्पादों के उपयोग को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया गया।
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