-प्रोजेक्ट रिपोर्ट को लेकर घर-घर गईं छात्राएं
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। मिनर्वा स्कूल घुमारवीं के नौवीं कक्षा की छात्राओं ने लोगों को बांस की उपयोगिता के बारे में बताया। बच्चों ने लोगों को समझाया कि बांस लगाने से भूस्खलन को रोका जा सकता है। छात्राओं ने इसे लेकर प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की थी, जिसे लेकर वह घर-घर गई और लोगों को जागरूक किया।
स्कूल छात्राएं सृष्टि, रिधीमा, सिया और दीपिका एक टिकाऊ इंजीनियरिंग सामग्री (बंबू अस ए सस्टेनेबल इंजीनियरिंग मटेरियल) पर अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर रही हैं। इसी प्रोजेक्ट को लेकर छात्राएं शनिवार को स्कूल के आसपास गांवों में जानकारी एकत्रित करने गईं तथा बांस की उपयोगिता के बारे में लोगों को बताया। उनके साथ संयोजक राजेंद्र कुमार, सह संयोजक आशीष शर्मा और अनिल शर्मा मौजूद रहे। छात्राओं ने लोगों को बताया कि भूस्खलन को रोकने के लिए बांस का उपयोग सफल पाया गया है। खतरनाक ढलानों में बांस के रोपण से भूस्खलन को रोका जा सकता है। उन्होंने समझाया कि बांस का पौधा घर के सौंदर्य को बढ़ाता है। यह पौधा हवा को शुद्ध करता है तथा उगाना आसान है। बांस एक बहुमुखी सामग्री है, जिसका उपयोग कागज और चादरें बनाने के लिए किया जाता है। यह इमारतों के लिए मचान के रूप में उपयोग करने के लिए काफी मजबूत है और ऊर्ध्वाधर निर्माण में इसके उपयोग का एक लंबा इतिहास है। इसके अलावा यह सामग्री अपने बायोफिलिक डिजाइन सौंदर्य के कारण फर्श और सजावटी तत्वों के रूप में मांग में है। बांस सबसे मजबूत पौधों में से एक है। यह बिना टूटे मुड़ भी सकता है। बांस न केवल लकड़ी जैसी अन्य सामग्रियों की तुलना में अधिक टिकाऊ और हल्का है, बल्कि यह पर्यावरण के अनुकूल और गैर-विषाक्त भी है, जो कई उद्योगों के लिए एक बड़ा लाभ प्रदान करता है। लोग इसे अपनी आजीविका कमाने में भी उपयोग कर सकते हैं। इससे तरह-तरह के बाजे जैसे बांसुरी, वायलिन बनाया जाता है। छोटी-छोटी घरेलू वस्तुओं से लेकर मकान बनाने तक के काम आता है। बांस की खपच्चियों से अनेक चीजें बनाई जाती हैं। इससे तरह-तरह की चटाइयां, टोपियां, टोकरियां, बर्तन, बैलगाड़ियां, फर्नीचर, सजावटी सामान खिलौने बांस के कागज बनाया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसका उपयोग घर बनाने और अन्य वस्तुओं का निर्माण करने के लिए किया जाता है। बांस में मैग्नीशियम, सोडियम, जिंक, कॉपर, पोटैशियम, फॉस्फोरस होने के कारण आयुर्वेद में इसको औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है।