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Bilaspur News: मिड-डे मील कर्मियों ने शिक्षा उप निदेशक के सामने रखीं समस्याएं

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- जनवरी से रुके हुए वेतन को तुरंत प्रभाव से जारी करने की मांग की
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। आल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) के बैनर तले मिड-डे मील कर्मियों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर प्रदेशाध्यक्ष कमलेश ठाकुर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय प्रतिनिधिमंडल उप शिक्षा निदेशक से मिले। इस दौरान उन्होंने अपनी समस्याओं को उनके समक्ष रखा। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त आबिद हुसैन सादिक से भी मिला।
एटक के राज्य वरिष्ठ उपाध्यक्ष लेखराम वर्मा ने बताया कि मिड-डे मील कर्मियों को जनवरी से रुका हुआ वेतन तुरंत प्रभाव से जारी किया जाए। इस वेतन की अदायगी के लिए हर माह की 7 तारीख सुनिश्चित की जाए। जिस कार्य के लिए सरकार ने उन्हें काम के लिए रखा है, उनसे केवल वही काम करवाया जाए। मिड-डे मील कर्मियों को नियमित करने की भी जोर-शोर से मांग उठाई। चिकित्सा प्रमाण पत्र, मिड-डे मील कर्मियों से नियुक्ति के समय ही लिया जाए। इसका नवीनीकरण संबंधित स्कूलों में ही निशुल्क बनाया जाए। यहीं नहीं उच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार सभी वर्करों को 10 माह की बजाए 12 माह का वेतन दिया जाए। कमलेश ठाकुर ने कहा कि जिन स्कूलों के रसोईघरों की हालत दयनीय है, उनकी तुरंत प्रभाव से मरम्मत की जाए। मिड-डे मील कर्मियों द्वारा रसोई में प्रयोग होने वाले सामान गैस सिलिंडर, ईंधन, राशन आदि को ढोने के लिए अपनी जेब से पैसे दिए जाते हैं, यह भाड़ा मिड-डे मील कर्मियों से न लिया जाए। जिन स्कूलों में 25 बच्चों की संख्या है वहां पर दो व्यक्तियों से काम लिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसे स्कूलों में केवल एक ही व्यक्ति से काम लेकर उनका शोषण किया जा रहा है। इस प्रतिनिधिमंडल में माला देवी, गोदावरी, नीलम कुमारी, फूला देवी, कला देवी, कांता देवी, दशोधा देवी, सुनीता देवी, निशा देवी, सोमा, मीना, मीरा देवी, निर्मला देवी, दमयंती व बिट्टू आदि मौजूद थे।
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उपायुक्त से मिलकर उन्होंने कहा कि मिड-डे मील वर्ग में अधिकांश महिलाएं हैं। हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में इस वर्ग से रात देर तक काम लिया गया। हैरानी की बात है कि इस काम के एवज में मिड-डे मील कर्मियों को कोई मेहनताना तक नहीं दिया गया जो कि गलत है। देर रात वापस घर आने के लिए कोई व्यवस्था तक नहीं थी ऐसे में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवालों का कटघरे में खड़ा होना स्वाभाविक है। यह मामला संवेदनशील है। इस पर प्रशासन को कड़ा संज्ञान लेना चाहिए।
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