भराड़ी (बिलासपुर)। कोरोना काल के दौरान पिछले तीन माह से मिड डे मील वर्करों को मानदेय नहीं मिल पाया है। इससे वर्करों में रोष व्याप्त है। वेतन न मिलने से प्रदेश भर के हजारों मिड डे मील वर्करों को परेशानी से गुजरना पड़ रहा है। मिड डे मील वर्करों को मार्च, अप्रैल और मई माह का वेतन नहीं मिला है। वर्कर यूनियन इंटक के प्रदेशाध्यक्ष इंद्रपाल और जिलाध्यक्ष मीरा जसवाल ने बताया कि करीब 22 हजार मिड डे मील वर्कर प्रदेश भर में कार्यरत हैं।
कई मिड डे मील वर्कर विधवा हैं तो कई मिड डे मील वर्कर बहुत ही गरीब परिवार से हैं। सरकार की तरफ से मिड डे मील वर्करों को 2300 रुपये मानदेय मिलता है। जबकि पिछले बजट में सरकार की ओर से 300 रुपये की बढ़ोतरी करने का एलान किया था। लेकिन प्रदेश भर के मिड डे मील वर्करों को पिछले तीन माह से कोई भी मानदेय नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि महज कुछ जगहों पर मार्च का मानदेय कुछेक मिड डे मील वर्करों को मिला है। प्रदेश भर में अधिकतर जगहों पर तीन महीने का मानदेय लंबित है। इंद्रपाल ने बताया कि कर्फ्यू के चलते मिड डे मील वर्करों को पैसों की जरूरत पड़ रही है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि जल्द ही मिड डे मील वर्करों को मानदेय दिया जाए। ताकि प्रदेश भर के हजारों मिड डे मील वर्करों को कोई परेशानी न हो।
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बजट मिलते ही होगा भुगतान : उपनिदेशक
मिड-डे-मिल वर्करों का तीन माह का बजट एक साथ भेजा जाता है। नए साल के बजट में मिड-डे-मिल वर्कर का तिमाही बजट बना कर भेज दिया गया है। बजट पास होने के बाद सभी वर्करों को मानदेय दिया जाएगा।
सुदर्शन कुमार, उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा