घुमारवीं/झंडूता(बिलासपुर)। स्वास्थ्य शिक्षक झंडूता रमेश चंदेल ने कहा कि लड़कियों की संख्या इसी प्रकार कम होती रही तो आने वाले समय में इसके घातक परिणाम सामने आएंगे। इसके लिए समाज को बेटा-बेटी में अंतर की अपनी सोच बदलनी होगी। वहीं उन्होंने कहा कि बेटियों के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए भी सरकार ने कई योजनाएं चला रखी हैं। वह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र झंडूता में ‘अमर उजाला’ के ‘अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स’ कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस कार्यक्रम में जिला भर की आशा वर्कर ने भाग लिया।
कहा कि किसी गर्भवती औरत के गर्भ की लिंग की जांच करवाकर, जबरदस्ती गर्भपात करवाना कानूनी अपराध है। इसके लिए लिंग जांच करने वाला डॉक्टर और करवाने वाले सभी दोषी माने जाएंगे और ऐसे व्यक्तियों के लिए सजा व जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।
बताया कि गर्भपात तभी करवाया जा सकता है जब बच्चा रहने से मां को या बच्चे को कुछ खतरा हो तो डॉक्टर की सलाह से गर्भपात करवाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि लड़कों की अपेक्षा यदि लड़कियों की जनसंख्या इसी तरह कम होती रही तो समाज के लिए यह घातक सिद्ध हो सकती है।
रमेश चंदेल ने बताया कि महिलाएं आज भी समाज में शारीरिक, भावनात्मक, आर्थिक व यौन हिंसा की शिकार हो रही है। इसके लिए लड़कियों और महिलाओं को जागरूक करने की जरूरत है ताकि वह कानून का सहारा लेकर अपने आप को सुरक्षित कर सकें।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग में सरकार द्वारा बेटियों को बढ़ावा देने के लिए इंदिरा गांधी बालिका सुरक्षा योजना चलाई है जिसमें एक बालिका पर परिवार नियोजन का ऑप्रेशन करवाने पर 35 हजार की एफडी बेटी के नाम और दो बालिकाओं पर ऑप्रेशन करवाने पर 25 हजार की एफडी बेटियों के नाम की जा रही है ताकि लिंग अनुपात ठीक आ जाए।
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महिलाओं को अपने अधिकार के बारे में जागरूक होना जरूरी
आशा कार्यकर्ता संघ जिला बिलासपुर की प्रधान वीना धीमान ने बताया कि बालिकाओं के साथ आज भी गर्भ से ही हिंसा शुरू हो जाती है और जन्म लेने के बाद मृत्यु तक हिंसा हो रही है तो महिलाओं को जागना चाहिए क्योंकि महिलाएं पुरुषों से कम नहीं ऐसा कोई काम नहीं जो महिलाएं नहीं कर सकतीं। धीमान ने बताया कि महिला हिंसा को रोकने के लिए महिलाओं को कानून के प्रति जागरूक करने की जरूरत है।
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बेटियों को अच्छी शिक्षा देना जरूरी
आशा कार्यकर्ता संघ की जिला महासचिव रोशनी देवी ने बताया कि यदि हम समाज में लड़का व लड़की में भेदभाव न करें और लड़कियों को अच्छी शिक्षा दें तो हम समाज से महिला और लड़कियों पर हो रही हिंसा को रोक सकते हैं।