मंगलवार देर रात हुई भारी बारिश के साथ ओलावृष्टि ने बागवानों की कमर तोड़ दी है। ओलावृष्टि से 25 से 30 फीसदी आम की फसल को नुकसान पहुंचा है। इस बार बागवान आम की बंपर फसल की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन मौसम की मार ने उस पर पानी फेर दिया।
जिला भर में मंगलवार देर रात तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि भी हुई है। इससे आम की फसल को जबरदस्त नुकसान पहुंचा है। तेज बारिश के साथ बरसे ओलों से पेड़ पर लगी फसल टूटकर जमीन पर गिर गई।
32 सौ हेक्टेयर में होती है आम की खेती
बिलासपुर जिला में करीब 32 सौ हेक्टेयर भूमि पर आम की पैदावार कर करीब दस हजार बागवान अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। इस वर्ष कम बारिश होने के कारण रबी की कम पैदावार होने से बागवान मायूस हो गए हैं। बागवानों को उम्मीद थी की आम इस बार बंपर पैदावार होगी। जोकि रबि फसल से हुए नुकसान की भरपाई भी कर देगी।
लेकिन, पहले सूखे, उसके बाद तूफान और अब मंगलवार शाम को ओलावृष्टि ने 25 से 30 फीसदी आम की फसल को नुकसान पहुंचाया है। बागवान केवल राम, बलदेव शर्मा, चंद्र कुमार शर्मा, जोगराज शर्मा, रतन चंद, मस्तराम, शंकरदास, महेन्द्र कुमार, रीता देवी, प्रेम चंद, हरवंश लाल, बर्फी राम, राजकुमार और अमरनाथ सहित अन्यों का कहना है कि कोटधार क्षेत्र में रबी की फसल बारिश पर निर्भर करती है।
इस बार क्षेत्र में कम बारिश होने के चलते रबी की फसल कम हुई, लेकिन उन्हें बागवानी में आम की फसल से पूरी उम्मीदें बंधी थी। बागवानों का कहना है कि ओलावृष्टि से कहीं बची हुई फसल को दाग की बीमारी न लग जाए।
इंडैफिल एम 45 और बैवस्टिन के घोल का करें छिड़काव
बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार ओलावृष्टि के नुकसान से फसल को बचाने के लिए इंडैफिल एम 45 और बैवस्टिन के घोल का छिड़काव बगीचों में करें और उसके एक सप्ताह के बाद बोरिक ऐसिड टॉनिक का छिड़काव करने से ओलावृष्टि आम पर पड़ने वाले दाग साफ हो जाएंगे।
उद्यान विभाग के उपनिदेशक राजपाल शर्मा ने बताया कि विभाग ओलावृष्टि से आम की फसल को हुए नुकसान के आंकड़े एकत्रित कर रहा है।