जोखिमभरा बना एम्स से भराड़ीघाट तक 19 किलोमीटर का सफर
बारिश में फिसलन और धूप में धूल से हर दिन जूझ रहे हजारों लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर/ जुखाला। नौणी से भराड़ीघाट तक निर्माणाधीन फोरलेन का काम क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है, लेकिन फिलहाल यह निर्माण कार्य आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है। एम्स बिलासपुर से भराड़ीघाट तक करीब 19 किलोमीटर का सफर इन दिनों धूल, कीचड़, जाम और उखड़ी सड़क के बीच पूरा हो रहा है। वहीं जिस रास्ते को बाइक चालक 20 मिनट में पूरा करते थे,उसके लिए अब 30 मिनट का समय लग रहा है।
पूरे मार्ग में शायद ही कोई ऐसा हिस्सा हो जहां वाहन सामान्य गति से चल पाए। जगह-जगह निर्माण कार्य के कारण सड़क संकरी हो गई है। कई स्थानों पर एक ही लेन से दोनों ओर का ट्रैफिक निकाला जा रहा है, जिससे थोड़ी-थोड़ी देर में वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। कई किलोमीटर तक वाहन रेंगते हुए आगे बढ़ते दिखाई देते हैं। मार्ग पर सबसे अधिक परेशानी एम्स बिलासपुर के बाहर, संगीरठी, विनायक घाट, ब्रह्मपुखर चौक, नम्होल, क्यारड़ और दगसेच के आसपास देखने को मिल रही है। इन स्थानों पर सड़क जगह-जगह उखड़ी हुई है। कहीं बड़े गड्ढे हैं तो कहीं कंकड़ और मिट्टी बिखरी हुई है। ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक जोखिम उठाना पड़ रहा है। हल्की सी चूक भी हादसे का कारण बन सकती है। बारिश ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है। सड़क पर कीचड़ और फिसलन के कारण वाहनों की रफ्तार और धीमी हो जाती है। कई स्थानों पर पानी भरने से सड़क और गड्ढों में अंतर करना मुश्किल हो जाता है। दस मिनट में पार होने वाला हिस्सा भी आधे घंटे में तय हो रहा है। दूसरी ओर धूप निकलते ही भारी वाहनों की आवाजाही से उड़ने वाली धूल पूरे मार्ग को धुंधला कर देती है। कई बार सामने से आने वाला वाहन भी स्पष्ट दिखाई नहीं देता। निर्माण कार्य के दौरान बनाए गए कलवर्ट भी नई समस्या बनते नजर आ रहे हैं। कई स्थानों पर बरसाती पानी खेतों की ओर बह रहा है, जिससे कृषि भूमि के डंगे गिरने लगे हैं। लगातार हो रहे भूमि कटाव से किसानों की चिंता बढ़ गई है। बरसात के दिनों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
इस मार्ग से रोजाना हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। मरीजों को लेकर एम्स पहुंचने वाले वाहन हों या रोजाना कार्यालय और कारोबार के लिए आने-जाने वाले लोग, सभी को जाम और खराब सड़क का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर निर्माण सामग्री सड़क किनारे पड़ी होने से रास्ता और संकरा हो गया है, जिससे ओवरटेक करना भी मुश्किल हो जाता है। पूरे मार्ग पर सबसे बड़ी समस्या यह है कि एक साथ धूल, कीचड़, जाम और खराब सड़क जैसी चारों परेशानियां वाहन चालकों को झेलनी पड़ रही हैं। धूप में धूल सफर मुश्किल बना देती है, बारिश में सड़क दलदल में बदल जाती है और निर्माण कार्य के कारण बार-बार लगने वाला जाम लोगों का समय और ईंधन दोनों बर्बाद कर रहा है। फोरलेन बनने के बाद यह मार्ग निश्चित रूप से बेहतर और सुरक्षित होगा, लेकिन जब तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक इस मार्ग पर सफर लोगों के लिए राहत नहीं बल्कि रोजाना की चुनौती बना हुआ है।
एम्स से भराड़ीघाट तक पहुंचने में लग रहे एक की जगह दो घंटे
पहले एम्स से भराड़ीघाट तक पहुंचने में करीब एक घंटा लगता था, लेकिन अब यह सफर दो घंटे में पूरा हो रहा है। सड़क की खराब हालत और बार-बार लगने वाले जाम के कारण यात्रियों को समय पर गंतव्य तक पहुंचाना मुश्किल हो गया है। कई जगह सड़क इतनी खराब है कि वाहन को पहली या दूसरी गियर में चलाना पड़ता है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य जरूरी है, लेकिन जब तक काम पूरा नहीं होता, तब तक सड़क को चलने योग्य बनाए रखना भी जरूरी है।
वाहन चालक पीसी शर्मा, स्याहोला
बारिश में बाइक चलाना मतलब हर मोड़ पर खतरा
दोपहिया वाहन चालक का कहना है कि इस मार्ग पर सबसे अधिक परेशानी बाइक चालकों को झेलनी पड़ रही है। बारिश में सड़क पर कीचड़ और फिसलन के कारण कई बार संतुलन बिगड़ जाता है। गड्ढों में पानी भरने से उनका अंदाजा भी नहीं लग पाता। धूप में उड़ने वाली धूल के कारण सामने से आने वाले वाहन तक दिखाई नहीं देते। ऐसे में हर दिन जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ता है।
-बाइक चालक अजय कुमार, ब्रह्मपुखर
कलवर्टों से लोगों के खेतों में घुस रहा पानी
फोरलेन निर्माण के दौरान बनाए गए कई कलवर्टों से बरसाती पानी सीधे खेतों की ओर छोड़ा जा रहा है। इससे खेतों के डंगे टूट रहे हैं और उपजाऊ मिट्टी बह रही है। कई जगह भूमि कटाव बढ़ गया है। यदि समय रहते जल निकासी की दिशा नहीं बदली गई तो आने वाले वर्षों में खेती करना और मुश्किल हो जाएगा।
-सुनील सिंह, किसान,दगसेच
धूल रोकने के लिए पानी का छिड़काव जरूरी
फोरलेन बनने से भविष्य में निश्चित रूप से क्षेत्र को लाभ मिलेगा, लेकिन वर्तमान में लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क की नियमित मरम्मत, धूल रोकने के लिए पानी का छिड़काव, सुरक्षित यातायात व्यवस्था और किसानों की भूमि की सुरक्षा के इंतजाम प्राथमिकता पर किए जाने चाहिए। विकास कार्य तभी सार्थक होगा, जब लोगों की रोजमर्रा की दिक्कतों का भी समाधान साथ-साथ किया जाए।
-अरुण शर्मा, धुंधन
निर्माणाधीन शिमला-मटौर फोरलेन पर विनायकघाट के पास सड़क की हालत और लगा जाम। संवाद
निर्माणाधीन शिमला-मटौर फोरलेन पर विनायकघाट के पास सड़क की हालत और लगा जाम। संवाद
निर्माणाधीन शिमला-मटौर फोरलेन पर विनायकघाट के पास सड़क की हालत और लगा जाम। संवाद
निर्माणाधीन शिमला-मटौर फोरलेन पर विनायकघाट के पास सड़क की हालत और लगा जाम। संवाद
निर्माणाधीन शिमला-मटौर फोरलेन पर विनायकघाट के पास सड़क की हालत और लगा जाम। संवाद