जिला के क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर में लैपरोस्कोपी सेट की सुविधा नहीं होने से मरीजों को लेजर ऑपरेशन करवाने के लिए पीजीआई चंडीगढ़ और आईजीएमसी शिमला जाना पड़ रहा है।
इससे जिला में सरकार के स्वास्थ्य सेवा को हाइटेक करने के दावे जमीनी स्तर पर हवाई साबित हो रहे हैं। हालात यह है कि जिला अस्पताल में अभी तक लैपरोस्कोपी सेट तक उपलब्ध नहीं है।
हालांकि अस्पताल में सर्जरी विशेषज्ञ चिकित्सक सेवाएं दे रहा है, लेकिन आधुनिक मशीनरी उपलब्ध न होने के कारण बड़े ऑपरेशन जिला अस्पताल में नहीं हो पाते हैं।
इस वजह से हार्ट और किडनी के बड़े ऑपरेशन के लिए हर माह करीब 30 से अधिक मरीजों को रेफर किया जाता है। इसकी वजह यह है कि सामान्य ऑपरेशन की जगह लेजर ऑपरेशन मरीज को कम दर्द और जल्द स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
इसी वजह से अब लोग लेजर ऑपरेशन करवाना चाहते हैं। विभागीय जानकारी के मुताबिक लैपरोस्कोपी सेट की कीमत करीब 50 लाख रुपये है।
अस्पताल में इसकी व्यवस्था करने के लिए उच्च अधिकारियों से पत्राचार भी किया जा चुका है। साथ ही अस्पताल में तैनात सर्जरी विशेषज्ञ चिकित्सक लंबे समय से इस मशीनरी की रिक्वायरमेंट अस्पताल प्रशासन को दे चुके हैं।
अस्पताल में लैपरोस्कोपी मशीन की व्यवस्था होने से मरीजों को पीजीआई और आईजीएमसी का रुख नहीं करना पड़ेगा। इससे उनके समय और पैसे दोनों में बचत होगी।
क्या है लैपरोस्कोपी सेट
लैपरोस्कोपी सेट सर्जरी ऑपरेशन के लिए प्रयोग होने वाली मशीनरी है। इससे हार्ट, किडनी, पथरी और अलसर सहित विभिन्न प्रकार के बड़े ऑपरेशन होते हैं। सामान्य ऑपरेशन में जहां मरीज 10 से 15 सेंटीमीटर का चीरा लगता है वहीं लेजर ऑपरेशन में मात्र एक सेंटीमीटर का चीरा लगाया जाता है।
लेजर ऑपरेशन मरीज को उसी दिन दवाईयां देकर छुट्टी दे दी जाती है तो वहीं सामान्य ऑपरेशन में कई दिनों तक ऑबजरवेशन में रखा जाता है।
लैपरोस्कोपी सेट को लेकर प्रोसेस जारी है। उच्चाधिकारियों को इस बारे में लिखा जा चुका है। बजट मिलते ही अस्पताल में जल्द ही इसकी व्यवस्था हो जाएगी।
डॉ. वीके चौधरी, जिला चिकित्सा अधिकारी बिलासपुर।