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Bilaspur News: लीड स्कूल मॉडल लागू, नए सत्र से सीबीएसई पाठ्यक्रम की तैयारी

Thu, 19 Feb 2026 11:55 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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बिलासपुर और घुमारवीं में सीबीएसई संबंधित चार स्कूल मर्ज
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अब एक ही परिसर में चलेंगे को-एड लीड शिक्षण संस्थान
बालक-बालिका वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों का हुआ विलय
बालक स्कूल के प्राचार्य संभालेंगे कमान, स्टाफ समायोजन प्रक्रिया शुरू

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। प्रदेश शिक्षा विभाग की अधिसूचना के बाद जिले में शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव शुरू हो गया है। जिले के दो प्रमुख शहरी क्षेत्रों बिलासपुर और घुमारवीं में संचालित बालक और बालिका राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को आपस में विलय कर सह-शिक्षा (को-एड) संस्थान बनाया जा रहा है। इस निर्णय के साथ ही प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है और विभाग ने नई व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इन स्कूलों को लीड स्कूल मॉडल के तौर पर तैयार कर नए सत्र से सीबीएसई पाठ्यक्रम की पढ़ाई शुरू होगी।
सरकारी आदेश के अनुसार अब ये विद्यालय अलग-अलग इकाइयों के रूप में संचालित नहीं होंगे, बल्कि संयुक्त संस्थान के रूप में एक ही परिसर में चलेंगे। शिक्षा विभाग का दावा है कि इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और विद्यार्थियों को अधिक विषय विकल्प व सुविधाएं मिल सकेंगी। अधिसूचना के अनुसार चार विद्यालयों को दो संयुक्त संस्थानों में बदला गया है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (बालक) बिलासपुर का विलय राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (बालिका) बिलासपुर के साथ। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (बालक) घुमारवीं का विलय राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (बालिका) घुमारवीं के साथ। विलय के बाद ये दोनों शहरों में दो बड़े सह-शिक्षा वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के रूप में कार्य करेंगे। विभाग ने इन संयुक्त संस्थानों को लीड स्कूल मॉडल के तहत विकसित करने की योजना बनाई है। इस मॉडल का उद्देश्य एक मजबूत शैक्षणिक केंद्र तैयार करना है, जहां पर्याप्त विषय विशेषज्ञ शिक्षक, प्रयोगशालाएं, खेल सुविधाएं और सहगामी गतिविधियों के संसाधन उपलब्ध हों।
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विभाग की योजना है कि आने वाले सत्र से इन स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू किया जाए, जिसके लिए शैक्षणिक ढांचे को उसी अनुसार तैयार किया जा रहा है। प्रशासनिक व्यवस्था के तहत संबंधित लीड स्कूल यानी पूर्व बालक विद्यालय के प्रधानाचार्य ही संयुक्त संस्थान के मुख्य प्रभारी होंगे। वे शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे। उप निदेशक उच्च शिक्षा रेणू कौशल ने कहा कि विभाग के दिशा निर्देशों के अनुसार बालिका विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने उपनिदेशक (उच्च शिक्षा) कार्यालय में रिपोर्ट कर दी है।
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स्टाफ समायोजन और 64 फैकल्टी की सूची तैयार
विलय के बाद पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए शिक्षा विभाग ने शिक्षकों और स्टाफ के समायोजन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार करीब 64 फैकल्टी सदस्यों की सूची तैयार कर ली गई है, जिसमें विभिन्न विषयों के प्रवक्ता, कला, संगीत, शारीरिक शिक्षा और अन्य गतिविधियों के विशेषज्ञ शिक्षक शामिल हैं। इस सूची को अंतिम रूप देकर चरणबद्ध तरीके से तैनाती की जाएगी ताकि नए सत्र से पढ़ाई सामान्य रूप से शुरू हो सके।
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एक ही परिसर में पढ़ेंगे छात्र-छात्राएं
सरकार की नीति के अनुसार पास-पास स्थित विद्यालयों को एकीकृत कर एक ही परिसर में चलाया जा रहा है। विभाग का कहना है कि इससे भवन, स्टाफ और संसाधनों के दोहराव को खत्म किया जा सकेगा। साथ ही विद्यार्थियों को बेहतर प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, खेल मैदान और गतिविधियों का अवसर मिलेगा।
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शिक्षा गुणवत्ता सुधारने का दावा
यह निर्णय शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धी माहौल देने के उद्देश्य से लिया गया है। लीड स्कूल मॉडल के तहत बड़े संस्थानों में पढ़ाई से परिणाम बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है। गरीब परिवारों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी। हालांकि, विभाग के सामने स्टाफ समायोजन, विद्यार्थियों के सेक्शन प्रबंधन और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार जैसी चुनौतियां भी रहेंगी, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से पूरा करने की योजना बनाई गई है।
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राजेश धर्माणी, तकनीकी शिक्षा मंत्री
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बिलासपुर शहर का राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (बालिका), जो 1950-52 से बेटियों को शिक्षा दे रहा था, उसे बंद करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और जनभावनाओं के खिलाफ फैसला है। यह संस्थान हमारे पूर्वजों ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए स्थापित किया था। आज उसी ऐतिहासिक स्कूल को बंद करना समाज के साथ अन्याय है। मैं मुख्यमंत्री से विनम्र आग्रह करता हूं कि बेटियों और बहनों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए इस गर्ल्स स्कूल को तुरंत बहाल किया जाए। अगर सरकार ने यह फैसला वापस नहीं लिया, तो भाजपा बेटियों और गरीब परिवारों के हक के लिए सड़कों पर उतरकर जोरदार आंदोलन करेगी।
त्रिलोक जमवाल, सदर विधायक
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