-घुमारवीं कॉलेज में शंकराचार्य पर विशेष व्याख्यान का आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। राजकीय महाविद्यालय घुमारवीं में जगद्गुरू शंकराचार्य पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह व्याख्यान भारतीय भाषा समिति शिक्षा मंत्रालय और महाविद्यालय के संस्कृत विभाग की ओर से आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में संस्कृत विभाग से सेवानिवृत्त प्रो. डॉ. ओमप्रकाश शर्मा और केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश में संस्कृत के सह आचार्य डॉ. जीएल पाटीदार ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम की शुरुआत में भारतीय भाषा समिति के अध्यक्ष चमू कृष्ण शास्त्री ने विद्यार्थियों को ऑनलाइन संबोधित किया। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य ने संस्कृत भाषा द्वारा विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के लोगों के बीच आत्मीयता और एकात्मकता के जरिए भारतीयता को बढ़ावा दिया है। उनके महत्वपूर्ण योगदान को याद करने के उद्देश्य से शिक्षा मंत्रालय की ओर से जगद्गुरू शंकराचार्य व्याख्यानमाला का आयोजन देशभर में किया जा रहा है। डॉ. ओम प्रकाश शर्मा ने नई शिक्षा नीति में भाषा के महत्व और शंकराचार्य के योगदान विषय पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भाषा सभी को एकता के सूत्र में बांधती है। भाषाओं में भिन्नता होने के बावजूद हमारा भाव एक है। मातृ भाषा से ही हम सर्वश्रेष्ठ बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि मातृभाषा का प्रयोग शिक्षण और अधिगम में होना चाहिए। इसमें हम सहज महसूस करते हैं और हमारी सीखने की गति को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी भाषा का प्रयोग पठन-पाठन और लेखन से शब्दों की साधना का अभ्यास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी नए सॉफ्टवेयर और तकनीक का प्रयोग करना भी सीखें। सह आचार्य डॉ. जीएल पाटीदार ने राष्ट्रीय एकता और शंकराचार्य विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने वैदिक सूत्र, श्री शंकराचार्य के जीवन चरित्र और उनके जीवन दर्शन पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन के अनुसार जीव और जगत दोनों एक ही ईश्वर के रूप हैं। उन्होंने एकात्मवाद दर्शन पर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य ने चार मठों की स्थापना से सांस्कृतिक विनिमय कर राष्ट्रीय एकता को बढ़ाया। साथ ही उन्होंने जीव और जगत के संरक्षण में अतुल्य योगदान दिया। प्रो. रामकृष्ण ने विद्यार्थियों से शंकराचार्य की शिक्षाओं को व्यावहारिक जीवन में आत्मसात करने और उनके सिद्धांतों पर चलने का आह्वान किया। कार्यक्रम की संयोजक डॉ. अंजना ने सभी का धन्यवाद किया और डॉ. रिप्पोन ने मंच संचालन किया। कार्यक्रम में भाषा एवं नाटक अकादमी के अध्यक्ष डॉ. कर्म सिंह ठाकुर, प्रो. प्रीतम लाल, प्रो. सीता राम, डॉ. नित्तम चंदेल, डॉ. सुरेश शर्मा, प्रो. बच्चन सिंह और अन्य उपस्थित रहे।