भूमि अधिग्रहण कार्य 30 अगस्त 2019 को हो चुका था पूरा, फिर भी किए नए अवार्ड घोषित
फोरलेन भूमि अधिग्रहण समिति को आरटीआई में दी गई जानकारी से हुआ खुलासा
15 जून 2021 तक थे 269 अवार्ड, राज्य सरकार को भेजी रिपोर्ट में हुई है 317 अवार्ड की पुष्टि
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। फोरलेन परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में बड़ी अनियमितताएं सामने आई हैं। आरटीआई सूचना के अनुसार 30 अगस्त 2019 को कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन का भूमि अधिग्रहण कार्य पूरा हो चुका था। इसके बावजूद संबंधित इकाई ने 31 अगस्त 2019 के बाद 2024 तक कुल 48 अवार्ड मकान, भूमि और पेड़ों के अधिग्रहण के लिए घोषित किए।
इस प्रक्रिया के दौरान फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति को बताया गया कि भूमि अधिग्रहण कार्य पूरा हो चुका है, जिससे प्रभावित लोगों और समिति दोनों को गुमराह किया गया। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने आरटीआई के जरिए जानकारी प्राप्त की है। आरटीआई में यह भी खुलासा हुआ कि 15 जून 2021 तक कुल 269 अवार्ड घोषित किए गए थे, जबकि राज्य सरकार को भेजी रिपोर्ट में कुल 317 अवार्डों की पुष्टि हुई। इस तरह 48 अवार्डों का अंतर स्पष्ट होता है। यह अंतर दर्शाता है कि 15 जून 2021 के बाद भू अर्जन अधिकारी ने 48 नए अवार्ड घोषित किए। रिपोर्ट में भूमि की इकाई को लेकर भी भ्रम है। कुछ अवार्डों में भूमि की इकाई बीघा में दर्ज है, जबकि अन्य में हेक्टेयर में। यह असमानता स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर भ्रम पैदा कर रही है। बिलासपुर में भूमि की मानक इकाई बीघा और बिस्वा में है, और पहले की रिपोर्ट में हर गांव की भूमि बीघा और बिस्वा में ही दर्शाई गई थी। केंद्र के पक्ष में भूमि के इंतकाल का विवरण भी नई रिपोर्ट में अधूरा है। पहले की रिपोर्ट में इंतकाल नंबर, तारीख और फैसले का पूरा विवरण था। विशेषज्ञों का कहना है कि 15 जून 2021 के बाद घोषित 48 अवार्डों के कारण केंद्र के पक्ष में दर्ज इंतकालों में इजाफा हुआ होगा।
बता दें कि 2021 के बाद किए गए 48 अवार्ड में भौर में आठ, कनैड में छह, डडौर में छह, चौक में नौ, गरा में एक, जड़ोल में एक, रोपड़ी में एक, चौमुखा में तीन, कोलेहड़ में एक, डोहडू में दो, पुंघ में एक, दौंहदी में एक, भटेड़ में एक, डैहर में दो, पलथीं में एक, औहर में एक,मल्यावर और बलोह में एक-एक अवार्ड किया गया है। कुल मिलाकर 48 अवार्ड मकान, भूमि और अन्य संपत्तियों के लिए घोषित किए गए। महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि भूमि अधिग्रहण कार्य 30 अगस्त 2019 तक पूरा हो चुका था। ऐसे में 2019 के बाद किए गए 48 अवार्डों का आधार और प्रक्रिया पूरी तरह अस्पष्ट है। रिपोर्ट में बीघा और हेक्टेयर की मिली-जुली जानकारी और भू अर्जन अधिकारी की ओर से समिति को दी गई गलत जानकारी से प्रभावित लोगों के बीच भ्रम और असंतोष पैदा हुआ है। बताया कि जो अवार्ड बाद में हुए वो किस उद्देश्य से हुए इसकी जांच होनी चाहिए।
फोरलेन अनियमितताओं को लेकर वो पहले से हाईकोर्ट में हैं। इस मामले को लेकर भी जल्द हाईकोर्ट का रुख करेंगे। ताकि साफ हो सके कि टैक्स पेयर का पैसा कहां और कितना खर्च हुआ है।