बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने रोड अलाइनमेंट बदलाव की रिपोर्ट को लेकर पीएम मोदी को पत्र भेज कर इसकी जांच किसी अन्य कमेटी से करवाने की मांग की है। पत्र में लिखा है कि जो पत्र उक्त फोरलेन अलाइनमेंट पर एनएचएआई ने पीएमओ को भेजा है, वह तथ्यों के आधार पर नहीं है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कीरतपुर से नेरचौक तक बन रहे फोरलेन के ब्राउन फील्ड एप्रूव्ड रोड अलाइनमेंट प्लान में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जो कि सरासर गलत है।
समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि फोरलेन में ग्रीन फील्ड अप्रूव्ड रोड अलाइनमेंट प्लान के रूट में हुए बदलाव की जांच जारी है। कहा कि इसकी निष्पक्ष जांच के लिए तहसीलदार बल्ह और उपतहसील डैहर जिला मंडी की ओर से उपायुक्त जिला मंडी को दिए गए पत्र में लिखा गया है कि अप्रूव्ड रोड अलाइनमेंट प्लान से हुए डेविएशन की नियमानुसार और निष्पक्ष जांच अप्रूव्ड रोड अलाइनमेंट प्लान, असल फुल स्केप भूमि अधिग्रहण प्लान, राइट ऑफ वे और ले आउट प्लान के बिना की जानी संभव नहीं है। कहा कि तहसीलदार घुमारवीं ने 25 अगस्त 2020 को उपमंडलाधिकारी घुमारवीं को अपनी रिपोर्ट में नियमानुसार जांच कर पुष्टि की है कि उपरोक्त परियोजना में नेशनल हाईवे की ओर से दिया गया भूमि अधिग्रहण प्लान रिडियूज है, फुल स्केप में नहीं है। वहीं, नेशनल हाईवे ने कुछ खसरा नंबरों का भूमि अधिग्रहण प्लान बनाया ही नहीं है।
इस परियोजना में खसरा नंबर 730 में बड़ा बदलाव किया है। परियोजना निदेशक एनएचएआई ने भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई मुख्यालय बिलासपुर को रिडियूज भूमि अधिग्रहण प्लान, जिसमें कि करुकान ही दर्ज नहीं है। वहीं, जिसमें पैमाना लगाने से भूमि की सही पैमाइश नहीं निकलती है, उपलब्ध करवाया तथा भू अर्जन अधिकारी ने परियोजना निदेशक को साल 2019 में पत्र लिखकर इसके बारे में अवगत भी करवाया है। कहा कि जब पहले करुकान दर्ज नहीं थे तो अब कैसे भूमि अधिग्रहण प्लान में करुकान लिखे जा सकते हैं। समिति ने पीएम से मांग की है कि परियोजना निदेशक एनएचएआई को आदेश दिए जाएं कि इस तरह मंत्रालय को गुमराह न की जाए और उपरोक्त सभी असल दस्तावेजों को जांच कमेटी को नियमानुसार दिलवाएं, ताकि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो सके और इस जांच में नेशनल हाईवे अथॉरिटी और भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई मुख्यालय जिला बिलासपुर हिमाचल प्रदेश के दोनों प्रतिनिधियों को जांच कमेटी से बाहर करें। वहीं, इनकी जगह कमेटी में अन्य विभागों के अधिकारियों को नियुक्त करें। वहीं अगर ऐसा किया जाना संभव न हो तो इस निष्पक्ष जांच में समिति को भी शामिल किया जाए।