अतिरिक्त सत्र न्यायधीश योगेश जसवाल की अदालत ने बिलासपुर कैंप के दौरान अपनी मंगेतर का कत्ल करने का अभियोग साबित होने पर एक व्यक्ति को उम्रकैद की सजा सुनाई है। आरोपी को दस हजार रुपये जुर्माना भी अदा करना होगा। जुर्माना न देने की सूरत में दोषी को दो महीने का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
जानकारी के मुताबिक बलवीर सिंह निवासी मयोथा जनाली (नयनादेवी) ने फरवरी 2013 को अपनी मंगेतर की सिर पर हथौड़ा मार कर हत्या की थी। 23 फरवरी 2013 को बलवीर की मंगेतर मृतका चंपा देवी अपने भाई संजू के साथ भटेड़ जंगल में घास और लकड़ियां लाने गई थी। करीब दो बजे बलबीर भी वहां आ गया। इसके बाद संजू वापस लौट आया। शाम तक चंपा घर नहीं लौटी तो संजू और उसकी माता, बहन, दादी ने पालतू कुत्ते की सहायता से उसकी खोज शुरू कर दी। जंगल में उन्हें चंपा का शव मिला।
परिजनों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस दल ने घटनास्थल से समीप एक हथौड़ा भी बरामद किया। इसी हथौड़ेे से चंपा की हत्या की गई थी। हत्या की वारदात को अंजाम देने करने के बाद आरोपी बलवीर ने स्वयं भी जहर निगल लिया। सीएचसी घवांडल में उपचार के दौरान उसने अपना गुनाह कबूल कर दिया। पुलिस ने बलवीर को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने बताया कि उसकी शादी चंपा से होने वाली थी लेकिन, वह उसकी चचेरी बहन को पसंद करता था। उसने शादी से मना कर दिया था। जिससे गुस्से में आकर उसने हथौड़े से चंपा के सिर पर प्रहार किए।
अदालत में इस मामले की पैरवी उप न्यायवादी संदीप अत्री ने की। उन्होंने 40 गवाह पेश कर यह गुनाह साबित कर दिखाया। अदालत ने आरोपी को भादंसं की धारा 302 के तहत हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। उन्होंने बताया कि आरोपी को दस हजार रुपये जुर्माना भी भरना पड़ेगा। जुर्माना नहीं भरने की सूरत में उसे दो महीने का अतिरिक्त कारावास भोगना पड़ेगा।