- बड़गांव पंचायत में संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने मनाई जयंती
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी एवं अल्पसंख्यक वर्ग संयुक्त संघर्ष मोर्चा द्वारा छेड़े गए संविधान बचाओ अभियान के तहत बड़गांव पंचायत में ज्योतिबा फुले की जयंती मनाई गई।
यहां पर आयोजित नुक्कड़ सभा में मोर्चा के जिला महामंत्री आचार्य नंदलाल ने लोगों को ज्योतिबा फुले की जीवनी के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि 11 अप्रैल 1827 को जन्मे ज्योतिबा फुले के पिता व्यवसायी थे और परंपराओं में विश्वास रखते थे। ज्योतिबा स्वाभिमानी थे। अल्पायु ही में उन्हें पाखंड और जातिगत व्यवस्था का बोध हो गया और इसमें परिवर्तन करने के लिए वह समाज में एक मिसाल बनकर उभरे। पढ़ाई की अहमियत समझने वाले ज्योतिबा फुले ने उस समय शूद्र परिवारों की बेटियों के लिए स्कूल और सांध्य कालीन विद्यालय भी खोले। ताकि वह शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहें। हिंदू विधवा विवाह पर पुनर्विचार, बाल विवाह, सती प्रथा को रोकने के लिए संघर्ष आदि महान कार्य उनके द्वारा किए गए। ज्योतिबा फुले 1840 में सावित्री बाई से परिणय सूत्र में बंधे। उन्होंने कहा कि 19वीं शताब्दी में समरता का कहीं नाम तक नहीं था। लोग अंधविश्वास की बेड़ियों में जकड़े थे। ज्योतिबा फुले ने हर चुनौती का सामना करते हुए सभी बाधाओं को पार कर समाज में नए सूर्य का उदय किया। संविधान बचाओ अभियान मोर्चा के झंडूता खंड के प्रधान अमर नाथ मोहिल्ला के नेतृत्व में चल रहा है। उन्होंने बताया कि जागरूकता अभियान के तहत वीरवार को सुन्हाणी, बड़गांव और रोहल पंचायत के विभिन्न गांवों में लोगों को जागरूक किया गया। इस अवसर पर बड़गांव पंचायत के उपप्रधान रमेश कुमार, फूंला देवी, सत्या देवी, रीना देवी, निशा देवी, धनी राम, तेज सिंह और अन्य उपस्थित रहे।
नालागढ़ की मस्जिद में नमाज अदा करते हुए। संवाद