भू-राजस्व अधिनियम में संशोधन और विभिन्न कार्यों में समय सीमा निर्धारित करने का किया विरोध
बोले,राजस्व के साथ अधिकारी/कर्मचारियों को करने पड़ते हैं कई अन्य कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। संयुक्त पटवारी एवं कानूनगो महासंघ की जिला कार्यकारिणी ने प्रदेश सरकार की ओर से किए गए भू-राजस्व अधिनियम में संशोधन एवं विभिन्न कार्यों की समय सीमा निर्धारण का विरोध किया है।
महासंघ की जिला कार्यकारिणी सहित समस्त सदस्यों ने एक रैली निकाल कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए तहसील कार्यालय झंडूता में इस अधिनियम को वापस लेने के लिए ज्ञापन दिया गया। सभी सदस्यों ने धरातल पर आवश्यक सुधार किए बिना सरकार के संशोधन का विरोध किया। सभी ने एकमत में कहा कि वर्तमान में पटवारी और कानूनगो के पास 45-50 प्रकार के काम रोजाना होते हैं। ऐसे में जब प्रदेश में 25 से 70 फीसदी विभिन्न जिलों में कानूनगो के पद रिक्त हैं, पटवारियों के पद भी रिक्त चल रहे हैं। निर्धारित अवधि में काम करेगा कौन यह चिंता का विषय है। पटवार कानूनगो महासंघ के जिला प्रधान भारत भूषण ने रैली को संबोधित करते हुए कहा है कि जनता के कार्य जल्दी हों। लंबित राजस्व कार्यों का निपटान हो, लेकिन यह तभी संभव है जब 100 प्रतिशत पद भरे हों। पटवारी कानूनगो से केवल राजस्व कार्य लिए जाएं। महासंघ के उप प्रधान बबलू राम ने कहा कि सरकार पटवारियों और कानूनगो के लिए वर्क चार्ट बनाए, निर्धारित करे कि कौन सा काम कब लेना है। इसकी समय सीमा क्या होगी। राजस्व कामकाज के अतिरिक्त कोई दूसरे काम न थोपे जाएं। यदि सरकार महासंघ के साथ समस्याओं के समाधान करने के बारे में बैठक निर्धारित नहीं करती है तो महासंघ आंदोलन करने पर विवश होगा। इसकी पूर्ण जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी।
उन्होंने कहा कि सरकार यदि महासंघ को विश्वास में लिए बगैर बिल को उनके ऊपर थोपने का प्रयास करती है तो इसके गंभीर परिणाम सरकार को भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि कानूनगो को अपने राजस्व कार्य करने का तो समय ही नहीं मिल पाता। प्रतिदिन विभिन्न प्रमाणपत्रों की रिपोर्ट फोन द्वारा भिन-भिन सूचनाओं को भेजना, प्रधानमंत्री मान सम्मान निधि योजना स्वामित्व योजना, मुख्यमंत्री सेवा के अंतर्गत समस्याओं का निदान आपदा में राहत संबंधी कार्य, फसल गिरदावरी, निर्वाचन कार्य, लोक निर्माण, वन, खनन, उद्योग आदि विभागों की अनेक परियोजनाओं के मौका कार्य एवं संयुक्त निरीक्षण कार्य व इंतकाल दर्ज करना, उच्च अधिकारियों, राजस्व अभिलेख को अध्ययन करने सहित कई ऐसे समय व्यतीत हो जाता है। माह के अंत में उन्नति निशानदेही तकसीम मांगी जाती है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा औसतन प्रतिमाह 30 से 40 जमीनी मामले आते हैं। ऐसी सूरत में तय की गई समय सीमा में काम नहीं किया जा सकता है। इसलिए सरकार इसके ऊपर पुनर्विचार करे अन्यथा आने वाले समय में गंभीर परिणाम भुगतने के लिए सरकार तैयार रहे। इस मौके पर देवेंद्र कुमार, रामपाल, आशीष कुमार, विशाल नड्डा, गोपालचंद, रजत कुमार, अंकुर कुमार, मनदीप, राजीव, जीवन, राजकुमार, अमिचंद, रविकांत, राजेश कुमार, अनीता देवी, ममता कुमारी और पूनम सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।