- जनहित से जुड़े जरूरी काम होंगे प्रभावित, विकास कार्यों पर लगेगा ग्रहण
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सदर के विधायक त्रिलोक जम्वाल ने प्रदेश सरकार द्वारा शहरी स्थानीय निकायों से ग्रांट-इन-एड का 50 फीसदी पैसा मांगने के आदेशों की कड़ी निंदा की। कहा कि आर्थिक तंगी का रोना रो रही इस सरकार ने शहरी स्थानीय निकायों की ग्रांट पहले ही कम कर दी है। अब इन निकायों को छठे वित्त आयोग के तहत इस वित्त वर्ष के लिए मिले बजट पर भी इनकी नजर पड़ गई है।
विधायक ने कहा कि इससे जहां जनहित से जुड़े जरूरी काम प्रभावित होंगे, वहीं विकास कार्यों पर भी ग्रहण लग जाएगा। इस तरह के बेतुके आदेश जारी करने के बजाए सरकार को अपने खर्चों में कटौती करनी चाहिए। प्रदेश सरकार ने 60 शहरी स्थानीय निकायों से ग्रांट-इन-एड का 50 फीसदी पैसा जमा करवाने को कहा है। शहरी विकास विभाग की ओर से इसके बारे में आदेश जारी किए गए हैं। इनमें 26 नगर पंचायतें, 29 म्युनिसिपल काउंसिल और 5 म्युनिसिपल कॉरपोरेशन शामिल हैं। इस लिहाज से इन निकायों को कुल 143.8 करोड़ रुपये जमा करवाने होंगे। नगर पंचायतों को 76.8 करोड़, म्युनिसिपल काउंसिल को 33.3 करोड़ तथा म्युनिसिपल कॉरपोरेशन को 33.74 करोड़ देने पड़ेंगे। यह ग्रांट छठे वेतन आयोग के तहत चालू वित्त वर्ष के लिए मिली है। प्रदेश सरकार ने पिछले साल की तुलना में इन निकायों की ग्रांट में पहले ही 20 फीसदी कटौती कर दी है। ऐसे में सरकार के इस नए बेतुके फरमान से संबंधित निकाय भी हैरान हैं।
त्रिलोक जम्वाल ने कहा कि अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों को अमलीजामा पहनाने के लिए निकाय काफी हद तक सरकार की ग्रांट पर निर्भर करते हैं। ऐसे में सरकार द्वारा उन्हें कुछ देने के बजाए उनसे पैसा लेना बेहद शर्मनाक है। बेहतर होगा कि इस जनविरोधी आदेश को तुरंत वापस लिया जाए, ताकि क्षेत्र के विकास और अन्य कार्यों को अमलीजामा पहनाने में निकायों को कोई परेशानी न हो।