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नॉर्थ जोन एथलेटिक्स खेलों को कराने की मंजूरी न देना शर्मनाक : रामलाल

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बोले, खेल मैदान, खेल उपकरणों के लिए भी मांगा किराया
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-मुख्यमंत्री से उठाई कड़ा संज्ञान लेने की मांग

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। नॉर्थ जोन एथलेटिक्स खेलों का आयोजन प्रदेश की बजाए दिल्ली में होने जा रहा है, क्योंकि यहां पर मैदान और खेल उपकरणों के लिए किराया मांगा गया। यह खिलाड़ियों और खेल के लिए चिंता का विषय है। यह बात पूर्व मंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामलाल ठाकुर ने कही।
बिलासपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने बताया कि एथलेटिक्स संघ की ओर से नॉर्थ जोन एथलेटिक्स खेलों को कराने के लिए खेल विभाग के अतिरिक्त निदेशक को पत्र लिखा गया। विभाग की ओर से खेलों को कराने के लिए मैदान और उपकरणों का भी किराया देने की बात की गई। इस कारण अब यह खेल प्रतियोगिताएं दिल्ली में आयोजित होंगी। रामलाल ने कहा कि देश भर में खेलों को बढ़ावा देने के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) का गठन हुआ। जब इसका गठन हुआ तो उन्हें भी इसमें सदस्य के रूप में शामिल किया गया। इसके बाद उन्होंने प्रदेश में खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए खेल छात्रावास खुलवाए। इसमें बिलासपुर, धर्मशाला, ऊना, शिलारू सहित अन्य स्थानों पर छात्रावास खुले, ताकि प्रदेश के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करें। इसके परिणाम भी मिले। साई छात्रावास से अजय ठाकुर जैसे खिलाड़ी निकले, जिन्होंने प्रदेश का नाम दुनिया में रोशन किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यहां की महिला खिलाड़ियों ने नाम कमाया। आज कुछ अधिकारी इस इन्फ्रास्ट्रक्चर को अपनी जागीर समझ बैठे हैं। यह खेलों के विकास के लिए उचित नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग उठाई कि इस मामले में कड़ा संज्ञान लिया जाए।
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इनसेट
खेल छात्रावास के भवन को महिला आईटीआई को देने की उठाई मांग
रामलाल ठाकुर ने जबली में बने खेल छात्रावास के भवन को महिला आईटीआई को देने की मांग उठाई। उन्होंने बताया कि यह भवन 1990 से 1992 के बीच बनाया गया है। उस समय इस पर 75 लाख रुपये खर्च किए गए। नेहरू युवा केंद्र के माध्यम से यह भवन बनाया गया। कुछ समय बाद इसकी हालत जर्जर हो गई। पिछली सरकार के समय में इसे गिराने के आदेश हुए हैं और इसे असुरक्षित घोषित किया गया है। साथ ही इसकी मरम्मत पर 20 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। उन्होंने बताया कि महिला आईटीआई बिलासपुर को दिया जाए, क्योंकि उन्हें इसकी आवश्यकता है। इससे भवन भी बचेगा और पैसे की बचत होगी।
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