मां को गुजारा भत्ता देने के मामले में गरीब बेटे को मिली आंशिक राहत
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत ने सुनाया फैसला
एसडीएम घुमारवीं के फैसले में मामले की सुनवाई के बाद किया संशोधन
मां को मिलती है विधवा पेंशन, बेटा बीपीएल में, परिवार के तीन लोगों का उठा रहा खर्च
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत ने माता-पिता भरण-पोषण अधिनियम के तहत दाखिल अपील में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने बेटे को आदेश दिया है कि वो अपनी मां को हर माह 1,000 रुपये गुजारा भत्ता देगा। जबकि एसडीएम कोर्ट ने 2500 रुपये मासिक देने के निर्देश दिए थे। लेकिन अदालत ने इस आदेश में संशोधन कर बेटे को आंशिक राहत दी है।
गांव पन्याला (डाकघर ढलोह) निवासी महिला ने अपने छोटे बेटे के खिलाफ हिमाचल प्रदेश माता-पिता भरण-पोषण अधिनियम के तहत गुजारा भत्ते का दावा किया था। उनका कहना था कि बड़ा बेटा उनकी मदद करता है, लेकिन छोटा बेटा एक पैसा नहीं देता। जबकि उसकी रोजाना 800 रुपये कमाई है, इसलिए भत्ता दिया जाए। एसडीएम (सिविल) घुमारवीं ने 12 सितंबर 2023 को महिला के छोटे बेटे को हर महीने 2500 रुपये गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ छोटे बेटे ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत में अपील दायर की। अपील में उसने बताया कि वह बीपीएल परिवार से है, बेरोजगार है, पत्नी और दो नाबालिग बेटे (दोनों आईटीआई की पढ़ाई कर रहे हैं) उसके ऊपर निर्भर हैं। मां को 1700 रुपये महीना विधवा पेंशन भी मिल रही है और वह मनरेगा में भी काम करती है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनीं। रिकॉर्ड देखा गया तो पता चला कि छोटे बेटे ने निचली अदालत में आखिरी तारीख 22 अगस्त 2023 को पेशी नहीं दी थी, इसलिए उसके गैर-हाजिरी में ही 2500 रुपये का आदेश हो गया था। कोर्ट ने अपने फैसले में माना कि मां-बेटे का रिश्ता निर्विवाद है, परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज है।
कोर्ट में यह साबित नहीं हुआ कि छोटा बेटा हर दिन 800 रुपये कमाता है। वहीं, यह साबित हुआ कि याची बीपीएल परिवार से है, परिवार के तीन और लोगों को पाल रहा है, मां को पेंशन भी मिल रही है। इसलिए अधिनियम के तहत बेटे की ओर से मां को मिलने वाली भरण-पोषण की राशि 2500 रुपये ज्यादा है। इसे घटाकर 1000 रुपये करना उचित होगा। अंत में कोर्ट ने 8 दिसंबर 2025 को अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए एसडीएम सिविल के आदेश को संशोधित कर दिया। संशोधन में आदेश दिया कि याची अब अपनी मां को 12 मई 2022 (आवेदन दाखिल करने की तारीख) से ही 1000 रुपये प्रतिमाह देगा। इस फैसले से जहां मां का हक बरकरार रहा, वहीं बेटे को भी काफी राहत मिली है।