बिलासपुर अस्पताल में चार माह में 1.42 लाख निशुल्क जांच, 1.20 करोड़ की प्रतिपूर्ति लंबित
एफडीएसआई के तहत अप्रैल से जुलाई तक बनीं 1,42,745 पर्चियां
2024-25 में हुई थीं 2,76,877 लोगों की निशुल्क स्वास्थ्य जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर में मरीजों की निशुल्क जांच का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इन जांचों के एवज में मिलने वाली 1.20 करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति राशि लंबित है। फ्री डायग्नोस्टिक सर्विस इनिशिएटिव (एफडीएसआई) के तहत चालू वित्तीय वर्ष में अप्रैल से जुलाई तक 1,42,745 जांचें की गई हैं। खास बात यह है कि चार महीने में हुई जांचों की संख्या पूरे वित्तीय वर्ष 2025-26 में हुई 1,23,507 जांचों से 19,238 अधिक है।
एफडीएसआई के तहत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को निर्धारित डायग्नोस्टिक जांच निशुल्क उपलब्ध करवाई जाती हैं। अप्रैल से जुलाई 2026 तक 1,42,745 जांचें हुई हैं। चार महीने में हुई इन जांचों का औसत करीब 35,686 जांच प्रतिमाह है। वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 में पूरे साल 1,23,507 जांचें हुई थीं। यानी चालू वित्तीय वर्ष के शुरुआती चार महीनों में ही पिछले पूरे साल की तुलना में 19,238 अधिक जांचें हो चुकी हैं।
जांचों की बढ़ती संख्या से अस्पताल में निशुल्क डायग्नोस्टिक सुविधा की मांग का अंदाजा लगाया जा सकता है। जांचों की संख्या बढ़ने के साथ जांच सामग्री और अन्य संसाधनों की जरूरत भी बढ़ती है। ऐसे में अस्पताल के लिए जांच के एवज में मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि का समय पर जारी होना जरूरी है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में एफडीएसआई के तहत 2,76,877 जांचें हुई थीं। इसके अगले साल 2025-26 में यह आंकड़ा घटकर 1,23,507 रह गया। अब 2026-27 में जुलाई तक ही 1,42,745 जांचें हो चुकी हैं। यदि इसी रफ्तार से जांचें जारी रहती हैं तो चालू वित्तीय वर्ष में जांचों का आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले काफी अधिक रहने की संभावना है।
निशुल्क जांच सुविधा का सीधा फायदा मरीजों को मिल रहा है। सामान्य तौर पर निजी लैब में करवाने पर जिन जांचों के लिए मरीजों को भुगतान करना पड़ सकता है, वे एफडीएसआई के तहत पात्र होने पर सरकारी अस्पताल में निशुल्क हो जाती हैं। इससे उपचार के दौरान मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम होता है।
मरीजों को जांच की सुविधा निशुल्क मिल रही है, लेकिन अस्पताल के लिए इसके एवज में मिलने वाली 1.20 करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति राशि लंबित है। यानी अस्पताल की ओर से मरीजों को सेवा उपलब्ध करवाए जाने के बाद उसके एवज में मिलने वाला भुगतान बाकी है। एक तरफ जांचों की संख्या लगातार बढ़ रही है और दूसरी तरफ प्रतिपूर्ति राशि लंबित है। ऐसे में अस्पताल की जांच व्यवस्था से जुड़े खर्चों की प्रतिपूर्ति समय पर होना जरूरी है, ताकि मरीजों को दी जा रही निशुल्क जांच की सुविधा पर असर न पड़े।
एफडीएसआई के आंकड़ों में पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान उतार-चढ़ाव भी देखने को मिलता है। 2024-25 में 2.76 लाख से अधिक जांचें हुई थीं। अगले साल यह संख्या करीब 1.23 लाख रह गई। अब चालू वित्तीय वर्ष के केवल चार महीनों में 1.42 लाख जांचें हो चुकी हैं।