लंबित मेडिकल बिल, डीए एरियर,वेतन आयोग का लाभ जल्द जारी करने की उठी मांग
80 से 90 वर्ष की आयु में गंभीर बीमारियों से जूझ रहे पेंशनरों को नहीं बिल का भुगतान
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। पुलिस वेलफेयर संगठन की बिलासपुर इकाई की एक बैठक वीरवार को घुमारवीं में हुई। जिसकी अध्यक्षता संगठन के जिला प्रधान रविंद्र ठाकुर ने की। इस अवसर पर संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक में मुख्य रूप से सेवानिवृत्त पुलिस कर्मियों से जुड़ी लंबित समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
पदाधिकारियों ने पेंशनर की वित्तीय देनदारियों, मेडिकल बिलों के लंबे समय से लंबित भुगतान तथा सातवें वेतन आयोग के लाभों को लेकर गंभीर चिंता जताई गई। जिला प्रधान रविंद्र ठाकुर ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि पेंशनर की सभी बकाया वित्तीय देनदारियों का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि कई पेंशनर 80 से 90 वर्ष की आयु में गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं, लेकिन वर्षों से उनके मेडिकल बिलों का भुगतान नहीं हो पाया है, जिससे उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द ही इन मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाती है तो संगठन को संघर्ष का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। बैठक में आगामी 29 अप्रैल को प्रस्तावित हिमाचल प्रदेश पुलिस पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन के राज्य स्तरीय प्रधान एवं कार्यकारिणी चुनाव को लेकर भी चर्चा की गई। इस दौरान बिलासपुर जिला से राज्य स्तरीय चुनाव में भाग लेने के लिए 10 प्रतिनिधियों के नामों पर सर्वसम्मति से सहमति बनी।
इन प्रतिनिधियों में महेंद्र सिंह, रविंद्र सिंह, त्रिलोक शर्मा, सुरेंद्र धर्माणी, छोटा राम चौधरी, हितेंद्र कुमार, राजेंद्र कुमार, कर्मचंद, प्रकाश चंद्र शर्मा तथा सरवन चंदेल शामिल हैं। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सातवें वेतन आयोग के लाभ, डीए एरियर तथा लंबित मेडिकल बिलों के भुगतान को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार की जाएगी। संगठन ने स्पष्ट किया कि पेंशनर के हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। बैठक का समापन संगठन की एकजुटता और पेंशनर के अधिकारों के संघर्ष के संकल्प के साथ हुआ। इस अवसर पर संगठन से जुड़े नए सदस्यों को सम्मानित किया गया और 90 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके एक वरिष्ठ सदस्य को विशेष रूप से सम्मान प्रदान किया गया। इस मौके पर जसवीर सिंह, सुरेंद्र धर्माणी, कर्मचंद, त्रिलोकचंद शर्मा, श्रवण चंदेल, सुरेंद्र पाल प्रमुख रूप से शामिल रहे।