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मस्तिष्क को सकारात्मकता की ओर लाने में ध्यान की अहम भूमिका : रचना

Sat, 21 Dec 2024 11:55 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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बिलासपुर ओपन जेल में आयोजित आर्ट ऑफ लिविंग सत्र में ध्यान लगाते कैदी। संवाद
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-बिलासपुर में कर्मचारियों, अधिकारियों, कैदियों ने किया ध्यान
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर के प्रयासों से 21 दिसंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने विश्व ध्यान दिवस के रूप में घोषित किया गया है। इसके तहत बिलासपुर मुख्यालय स्थित उपायुक्त कार्यालय के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने ध्यान किया।
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उसके बाद बिलासपुर की ओपन एयर जेल में कैदियों ने भी ध्यान का अभ्यास किया। इस ध्यान का अभ्यास आर्ट ऑफ लिविंग की प्रशिक्षक रचना मेहता ने करवाया। उन्होंने बताया कि आज एक एतिहासिक क्षण है क्योंकि दुनिया पहले विश्व ध्यान दिवस को मना रही है। ध्यान दुनिया भर के लोगों को आंतरिक शांति और आत्म खोज की ओर ले जाने के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाश के रूप में उभरा है। इस साल की थीम वैश्विक शांति और सद्भाव के लिए ध्यान है। उन्होंने बताया कि इन दिनों पूरी दुनिया में मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित तमाम समस्याएं बड़ी चुनौती हैं। मानसिक समस्याओं में ध्यान को बहुत कारगर माना जाता है। साथ ही ध्यान व्यक्ति के मस्तिष्क को नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर लाने में बड़ी अहम भूमिका निभाता है। एक अनुमान के मुताबिक मानसिक समस्याओं के कारण हर 45 सेकंड में एक आत्महत्या होती है। इस समस्या का समाधान ध्यान को माना जा रहा है, जो कि एक प्रभावी उपाय है। आर्ट ऑफ लिविंग के जिला मीडिया कोऑर्डिनेटर अरुण डोगरा रीतू ने बताया कि ध्यान न केवल लोगों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है बल्कि यह समाज में शांति और एकता का संदेश भी देता है। इस अवसर पर आर्ट ऑफ लिविंग की संस्कार प्रशिक्षक मीरा भोगल, डीडीसी मेंबर अनिल मेहता, विक्की भट्टा आदि उपस्थित रहे।
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