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Bilaspur News: जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे से हटाए जाएंगे अवैध कब्जे

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कीरतपुर-नेरचौक राजमार्ग पर 56 स्थानों पर अवैध कब्जे चिह्नित



हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने तेज की कार्रवाई



चारों उप-मंडल अधिकारियों को एक माह में कार्रवाई कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश



उच्च न्यायालय में लंबित याचिकाओं के बीच बढ़ा प्रशासनिक दबाव



सरोज पाठक



बिलासपुर। जिले में राष्ट्रीय राजमार्गों पर लंबे समय से बने अवैध कब्जों, अनधिकृत निर्माणों और अवैध पहुंच मार्गों के खिलाफ जिला प्रशासन ने अब निर्णायक कार्रवाई के संकेत दिए हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के सख्त रुख के बाद उपायुक्त कार्यालय ने जिले के सभी उप-मंडल अधिकारियों को एक महीने के भीतर अतिक्रमण हटाने और विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए हैं।



यह पूरा मामला हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में विचाराधीन जनहित याचिकाओं से जुड़ा हुआ है। इन मामलों में राष्ट्रीय राजमार्गों पर अतिक्रमण और सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर लगातार सुनवाई जारी है। इसी बीच एनएचएआई की ओर से जिला प्रशासन को भेजी गई ताजा रिपोर्ट ने स्थिति को गंभीर बताया है। एनएचएआई के परियोजना निदेशक (पीआईयू-मंडी) ने पत्र में उल्लेख किया है कि पूर्व में अतिक्रमण हटाने के अभियानों के बावजूद कीरतपुर-नेरचौक राष्ट्रीय राजमार्ग के कई हिस्सों में फिर से बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे, स्थायी और अस्थायी निर्माण तथा अवैध पहुंच मार्ग विकसित कर लिए गए हैं। इसके बाद प्रशासन ने मामले को अति आवश्यक श्रेणी में रखते हुए तुरंत कार्रवाई का निर्णय लिया है। उपायुक्त बिलासपुर कार्यालय ने जिले के चारों उप-मंडलों के उप-मंडल अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में एनएचएआई द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची के आधार पर मौके पर जाकर सत्यापन करें और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित करें। यह निर्देश उप-मंडल अधिकारी सदर, झंडूता, घुमारवीं, श्री नयना देवी जी को दिए गए हैं। इन सभी अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि कार्रवाई पूरी होने के बाद विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट अनिवार्य रूप से एक महीने के भीतर प्रस्तुत की जाए। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान को कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाएगा। इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग नियंत्रण अधिनियम, 2002 की धारा 26 के अंतर्गत सक्षम राजस्व अधिकारियों को वैधानिक नोटिस जारी करने की शक्तियां प्राप्त हैं।
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पहले चरण में चिह्नित अतिक्रमणों की सूची के आधार पर नोटिस जारी किए जाएंगे, जिसके बाद मौके पर जमीनी स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार के विरोध या तनाव की स्थिति से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन को भी सतर्क किया गया है। पुलिस अधीक्षक से भी आग्रह किया है कि वे आवश्यकतानुसार पर्याप्त पुलिस बल, महिला पुलिस कर्मियों और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करें। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में रहकर की जाएगी। एनएचएआई की विस्तृत सूची के अनुसार कीरतपुर-नेरचौक राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुल 56 स्थानों पर अवैध कब्जे पाए गए हैं। इनमें से 46 स्थान ग्रीनफील्ड खंड और 10 स्थान ब्राउनफील्ड खंड में स्थित हैं। यह कब्जे कहीं अस्थायी ढांचे के रूप में हैं तो कहीं पक्के निर्माण और अवैध पहुंच मार्ग के रूप में सामने आए हैं, जो राष्ट्रीय राजमार्ग की चौड़ाई और सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर बाधा बन रहे हैं। ग्रीनफील्ड हिस्से में सबसे अधिक अतिक्रमण दर्ज किए गए हैं। यहां कई स्थानों पर सड़क किनारे स्थायी निर्माण और अस्थायी ढांचे दोनों पाए गए हैं।



इनसेट

प्रमुख प्रभावित क्षेत्र
थापना (चेनेज 016+560 से 017+770) अस्थायी कब्जे
सुन्हण (चेनेज 019+600 से 020+260) स्थायी व अस्थायी दोनों प्रकार के निर्माण
भराड़ी (चेनेज 129+500 से 130+800) बड़े पैमाने पर पक्के निर्माण
पडगल (चेनेज127+080 से 127+250) अस्थायी कब्जे
कोठी (चेनेज 134+350 से 135+040) – मिश्रित कब्जे


इनसेट



ब्राउनफील्ड खंड में 10 स्थानों पर अतिक्रमण

ब्राउनफील्ड खंड में भी स्थिति गंभीर पाई गई है, जहां कुल 10 स्थानों पर अवैध कब्जे और निर्माण चिह्नित किए गए हैं। इन स्थानों पर बने निर्माणों को सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया गया है, क्योंकि इनसे राजमार्ग पर सीधे वाहनों के अनियंत्रित प्रवेश हो रहे हैं।
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इनसेट



एक महीने में कार्रवाई पूरी करने का सख्त आदेश

जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि एक महीने के भीतर न केवल सभी अवैध कब्जे हटाए जाएं, बल्कि पूरे अभियान की विस्तृत रिपोर्ट भी सौंपनी होगी। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई पूरी नहीं की गई तो इसे न्यायालय के आदेशों की अवमानना माना जाएगा और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई भी हो सकती है।
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