नेरचौक-कीरतपुर फोरलेन निर्माण के दौरान वन भूमि और सतलुज नदी में मलबा डालने के मामले में वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए काम को रुकवा दिया है। संबंधित क्षेत्र के पटवारी ने मौके पर काम रोकने को आदेश जारी किए हैं।
डीएफओ बिलासपुर सीवी ताशीलदार ने बताया कि अभी तक कंपनी से 1.50 लाख रुपये के करीब डैमेज रिपोर्ट काटकर वसूल लिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन सड़क निर्माण के दौरान मौजा मैहला में वन भूमि में अवैध डंपिंग कर मलबा सतलुज नदी और वन भूमि में डाला जा रहा था। इससे जहां वन संपदा को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
वहीं सतलुज नदी का पानी भी दूषित हा रहा है। लगातार नदी में मलबे की डपिंग से सारा मलबा भाखड़ा डैम में जा रहा हैं। हैरानी इस बात की है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद भी यह सबकुछ चल रहा है जबकि एनजीटी ने अपने आदेशों में साफ कहा है कि किसी भी हाल में सतलुज नदी में मलबा नहीं डाला जाएगा। इसके लिए जिला प्रशासन के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई हैं।
इस पूरे मामले को लेकर अमर उजाला ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने हरकत में आते हुए संबंधित क्षेत्र के आरओ को कार्रवाई के आदेश जारी किए थे।
क्षेत्र के फॉरेस्ट गार्ड प्रकाश ने बताया कि डंपिंग के कार्य को रोक दिया है। हालांकि कंपनी के डंपिंग में इस्तेमाल वाहनों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस बारे में डीएफओ बिलासपुर सीवी ताशीलदार ने बताया कि इस संबंध में संबंधित आरओ को कार्रवाई करने के लिए कहा गया था। उन्होंने बताया कि अभी वह अवकाश पर है। इसलिए अभी इस संबंध में कुछ नहीं बता सकते।