फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bilaspur News: अफवाहों से बचें, बेटियों को एचपीवी टीका जरूर लगवाएं

विज्ञापन
विज्ञापन
बीएमओ झंडूता बोले- सर्वाइकल कैंसर से बचाव में 90 से 95 फीसदी तक प्रभावी है वैक्सीन
विज्ञापन

कैंसर से बचाव के लिए पात्र बालिकाओं को लगाया जा रहा टीका

संवाद न्यूज एजेंसी

गेहड़वीं (बिलासपुर)। झंडूता स्वास्थ्य खंड में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) टीकाकरण अभियान के तहत पात्र बालिकाओं का टीकाकरण किया जा रहा है, लेकिन निर्धारित लक्ष्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से आगे आकर अपनी बेटियों का टीकाकरण करवाने की अपील की है। विभाग का कहना है कि यह टीका सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है और पूरी तरह सुरक्षित है।

खंड चिकित्सा अधिकारी झंडूता डॉ. अतुल भारद्वाज ने बताया कि भारत में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे सामान्य कैंसर है। हर वर्ष देश में करीब 1.2 से 1.3 लाख नए मामले सामने आते हैं, जबकि लगभग 75 से 80 हजार महिलाओं की इस बीमारी से मौत हो जाती है। उन्होंने कहा कि इस कैंसर का प्रमुख कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) संक्रमण है, जो सामान्यतः कम उम्र में होता है। इसलिए वायरस के संपर्क में आने से पहले टीकाकरण कराने से बेहतर सुरक्षा मिलती है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार जिन बालिकाओं ने 14 वर्ष की आयु पूरी कर ली है, लेकिन 15 वर्ष पूरे नहीं किए हैं, वे इस टीकाकरण के लिए पात्र हैं। विशेष अभियान के तहत 15 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद भी अतिरिक्त 90 दिनों तक टीका लगवाने की सुविधा दी जा रही है, ताकि कोई भी पात्र बालिका इस लाभ से वंचित न रहे। पात्र बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन की केवल एक खुराक दी जाती है, जो सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ 90 से 95 प्रतिशत तक सुरक्षा प्रदान करती है। यह वैक्सीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थाओं द्वारा अनुमोदित है तथा दुनिया भर में करोड़ों लोगों को लगाई जा चुकी है। टीकाकरण के बाद हल्का बुखार या इंजेक्शन वाली जगह पर हल्का दर्द जैसी सामान्य प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं, जो कुछ समय बाद स्वतः ठीक हो जाती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से इस टीके को लेकर कई तरह की भ्रामक जानकारियां फैलाई जा रही हैं। कुछ लोग इसे मासिक धर्म, भविष्य में संतानोत्पत्ति या प्रजनन क्षमता से जोड़कर अफवाहें फैला रहे हैं, जबकि इन बातों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे केवल स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जा रही प्रमाणित जानकारी पर ही विश्वास करें। निजी अस्पतालों में इस वैक्सीन की एक खुराक की कीमत करीब 10 हजार रुपये तक होती है, जबकि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में यह पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। वर्तमान में स्कूलों में अवकाश होने के कारण अभिभावक अपनी बेटियों को निकटतम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या कोल्ड चेन प्वाइंट पर लेकर आएं, जहां प्रत्येक बुधवार और शनिवार को टीकाकरण किया जा रहा है। यदि किसी गांव, पंचायत या क्षेत्र में चार से पांच या उससे अधिक पात्र बालिकाएं टीका लगवाना चाहती हैं तो स्वास्थ्य विभाग विशेष टीम भेजकर उसी पंचायत में टीकाकरण की व्यवस्था भी करेगा। इसके लिए संबंधित पंचायत प्रतिनिधि या अभिभावक स्वास्थ्य विभाग से संपर्क कर सकते हैं। अपील करते हुए कहा कि वे अपनी बेटियों का समय रहते टीकाकरण अवश्य करवाएं और समाज में फैली अफवाहों से बचें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें