- घुमारवीं क्षेत्र मेंं पिछले डेढ़ महीने में दो नवजात बच्चे मिले
- नवजात बच्चे को छोड़ने वालों का अभी तक नहीं लगा कोई पता
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। बरमाणा क्षेत्र में एक नवजात बच्चे के लावारिस अवस्था में मिलने की घटना ने जहां एक तरफ 9 महीने गर्भ में रखकर संतान को जन्म देने वाली मां की ममता को शर्मसार किया है। दूसरी ओर सरकार की ओर से चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
जिले में डेढ़ माह में लावारिस अवस्था में दो नवजात बच्चे के मिलने से यह भी साबित हो गया है कि मात्र नारे लगाने से समाज की दृष्टिकोण में कोई सुधार नहीं होने वाला है। इस घटना के बाद प्रशासन की कार्य प्रणाली पर भी सवाल उठने शुरू हो गए हैं, क्योंकि डेढ़ माह पहले घुमारवीं में नवजात मृत बच्चा मिलने के बाद प्रशासन ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आपात बैठकों का आयोजन कर बड़े दावे किए थे। प्रशासन के वह सभी दावे मात्र आदेशों तक ही सीमित रह गए। बरमाणा की इस घटना के बाद एक बार फिर से अवैध भ्रूण लिंग जांच और अवैध गर्भपात के कारोबार की आशंका उठने लगी है। क्योंकि जिस तरह से जिले में लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, उसे इन आशंकाओं को और अधिक पुख्ता कर दिया है। इस प्रकार की घटना घुमारवीं क्षेत्र में तीन बार पहले भी हो चुकी है। कुछ साल पहले घुमारवीं शहर में सड़क के किनारे रखे गए कूड़ेदान में एक नवजात बच्चे के शव मिला था, लेकिन संबंधित विभागों को शायद कानों कान खबर नहीं है। या फिर यू कहें कि संबंधित विभाग सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंदकर बैठे हुए हैं। हैरानी इस बात की भी है कि पिछले माह घुमारवीं में मिले नवजात बच्ची के शव की जांच में भी अभी पुलिस के हाथ कोई सुराग नहीं लगा है। उस समय जिला प्रशासन ने आपात बैठकों का आयोजन कर ऐसे कृत्यों पर रोक लगाने के लिए कड़ी कार्रवाई की बात कही थी। जिले के सभी अल्ट्रासाउंड और निजी क्लीनिकों पर छापेमारी कर उनके रिकॉर्ड चेक करने के आदेश स्वास्थ्य विभाग को दिए गए थे । यह सारे आदेश कागजों तक ही सीमित रह गए। यही कारण रहा है कि विभागों की अनदेखी और पुलिस की कमजोर तहकीकात की वजह से ही यह मामला आगे नहीं बढ़ पाया। यह मामला सिर्फ कागजों में ही रफा दफा हो गया।