प्रदेश हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद भी परिवहन कर्मियों ने मंगलवार को सुबह चार बजे से मांगों को लेकर जिला में चक्का जाम कर दिया। इससे जिला के हजारों लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा।
सबसे अधिक परेशानी ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को पेश आई। वहीं रूट प्रभावित होने से एचआरटीसी को भी लाखों का नुकसान हुआ है। कई यात्रियों ने बस अड्डे पर टिकट भी काट दिए गए थे।
लेकिन इसके बाद भी वह निगम की बसों में सफर नहीं कर पाए। हड़ताल के कारण सरकारी कर्मचारियों और स्कूल, कॉलेज के छात्रों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
बसों की सुविधा न होने से उन्हें कई किलोमीटर का पैदल सफर करके अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा। मंगलवार को हुई हड़ताल से जिला में एचआरटीसी के करीब 124 रुट प्रभावित हुए जबकि लाखों का नुकसान भी हुआ।
जिला में हालत ऐसी थी कि निगम के कर्मचारियों ने निजी बसों को भी बस अड्डे में प्रवेश नहीं करने दिया। संयुक्त समन्वयन समिति (जेसीसी) के बैनर तले सैकड़ों कर्मचारियों ने मुख्यालय के बस अड्डे पर धरना प्रदर्शन किया।
कर्मचारियों ने निगम और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। जेसीसी के अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता, सचिव सुरेंद्र कुमार, सलाहकार प्रताप सिंह ठाकुर, प्रचार मंत्री राजेंद्र ठाकुर, संगठन मंत्री प्रदीप कुमार, परिचालक संगठन के प्रधान कृष्ण चंद, अध्यक्ष सरवण कुमार और सचिव लेखराज ने उपस्थित कर्मचारियों को संबोधित किया।
उन्होंने मांग उठाई कि हिमाचल पथ परिवहन निगम को रोडवेज बनाया जाए औरप्राइम बजट का प्रावधान किया जाए, एचआरटीसी में कर्मचारियों की भर्ती अनुबंध नीति के तहत की जाए और सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों को पेंशन और भत्ता समय पर दिया जाए। इस दौरान सैकड़ों कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए।
उधर, जिला के अन्य क्षेत्रों में भी हड़ताल पर का व्यापक असर देखने को मिला। घुमारवीं के दूर-दराज क्षेत्र से छात्रों को स्कूल तक पहुंचने में काफी परेशानी आई।
निजी बसों की छतों में सफर करने को मजबूर लोग: निगम के कर्मचारियों की हड़ताल के चलते मुख्यालय पर स्थित बस अड्डे में निजी बसों को प्रवेश नहीं करने दिया गया। निजी बसों से यात्रियों का उतार-चढ़ाव बस अड्डा के बाहर से ही किया गया। इस दौरान निजी बसों में यात्रियों की संख्या अधिक होने के चलते ओवर लोडिंग भी खूब हुई। कई निजी बसों में यात्रियों को मजबूरन बसों की छतों पर सफर करना पड़ा।
स्टॉपेज पर करते रहे बसों का इंतजार: एचआरटीसी की बसों के न चलने से जिला भर में यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। चिलचिलाती धूप में बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे स्टॉपेज में घंटों बसों का इंतजार करते रहे। बसें न मिलने पर ज्यादातर को पैदल ही अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा। इस वजह से पूरा दिन यात्री यहां-वहां भटकते रहे। कई यात्रियों को निजी गाड़ियों के माध्यम से अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा। इसका फायदा उठाकर निजी टैक्सी चालकों ने भी मनमाने दाम वसूले।
निगम को हुआ लाखों का नुकसान : एचआरटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक संतोष कुमार ने बताया कि कर्मचारियों की हड़ताल से करीब 124 लोकल और बाहरी रूट प्रभावित हुए हैं। इस कारण निगम को करीब साढ़े सात लाख रुपये का नुकसान हुआ है।