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एक साल में बनाया जाए बवखाल पुल को: हाई कोर्ट

Sat, 02 Jul 2016 11:55 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिलासपुर।
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चीफ जस्टिस मंसूर अहमद मीर और संदीप शर्मा की खंड पीठ ने प्रदेश सरकार को बवखाल पुल का निर्माण कार्य एक साल में पूरा करने के आदेश जारी किए है। प्रदेश हाईकोर्ट ने यह फैसला जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए सुनाया है। इस पुल का निर्माण पिछले करीब दस वर्षों से लटका हुआ है।
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उल्लेखनीय है कि इस पुल के बनने से झंडूता और श्री नयना देवी की 20 पंचायतों के हजारों लोगों को लाभ मिलना था। विभाग की लापरवाही के कारण पुल का निर्माण शुरू तो हुआ था लेकिन अधूरा ही रह गया।

18.46 करोड़ खर्च करने के बाद मात्र पिल्लरों का निर्माण हो पाया था। इसके बाद पुल के 76.74 करोड़ रुपये बजट की और मांग की गई थी। इसके बाद कंपनी ने बताया कि पुल का निर्माण कार्य डेंजर जोन में हो रहा था।
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जबकि साथ लगती साइट से पुल निर्माण कार्य लगभग 45.3 करोड़ में एस्टीमेट बनाया गया है। इसके बाद याचिका कर्ता में हाईकोर्ट से मांग की थी कि सरकार को पुल निर्माण करवाने का एक तय समय दें।

जनहित याचिका की सुनवाई करने के बाद प्रदेश हाईकोर्ट ने 29 जून को अपने फैसले में कहा कि सरकार पुल का निर्माण कार्य एक साल के अंदर करने के आदेश दिए हैं।

दस सालों में भी नहीं बना पुल :  याचिकाकर्ता
याचिका कर्ता पूर्व प्रधान ग्रांम पंचायत सलवाड़ कांशी राम का कहना है कि पुल का शिलान्यास 2005 में तत्तकालीन मुख्यमंत्री वीरभ्रद सिंह ने किया था। जिसके बाद इस काम गैम इंडिया कंपनी ने शुरू किया था। लेकिन 2008 में कंपनी ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए काम बंद कर दिया था।

50 हजार लोगों को मिलना है पुल का लाभ
याचिका कर्ता पूर्व प्रधान ग्रांम पंचायत सलवाड़ कांशी राम ने बताया कि कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार ने खुद कोर्ट को बताया है कि इस पुल के निर्माण से 50 हजार लोगों को लाभ मिलेगा।

हजारों लोग जान जोखिम में डालकर करते हैं सफर
बवखाल पुल का निर्माण न होने के कारण 20 पंचायतों के हजारों लोग हर रोज अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। पुल न बनने से लोगों को हर रोज गोबिंदसागर में बोट के माध्यम से सफर करना पड़ता है। कई बार मौसम खराब होने से बोट पलट जाती है और इसमें कई लोगों की जान चली जाती है। पूरे मामले में प्रदेश सरकार और प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा आम जनता भुगतने को मजबूर है।
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