ओपीडी 450 से बढ़कर 700 के पार, त्वचा रोग, आंखों के संक्रमण और जलजनित बीमारियों के मरीज बढ़े
कुछ दिन पहले एक बिस्तर पर दो-दो मरीजों का करना पड़ा उपचार, अब हालात सामान्य होने का दावा
स्वास्थ्य विभाग ने कहा, दूषित पानी और खुले खाद्य पदार्थों से बचें
लक्षण दिखने पर तुरंत लें चिकित्सकीय सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। जिले में लगातार बढ़ रहे तापमान का असर अब लोगों की सेहत पर भी पड़ने लगा है। भीषण गर्मी के चलते विभिन्न बीमारियों के मामलों में इजाफा होने से सिविल अस्पताल घुमारवीं में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हालात यह हैं कि अस्पताल की ओपीडी सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक हो गई है और चिकित्सकों पर भी कार्यभार बढ़ गया है।
अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार सामान्य दिनों में प्रतिदिन 400 से 450 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं, लेकिन इन दिनों यह संख्या बढ़कर 700 से अधिक हो गई है। गर्मी के मौसम में सबसे ज्यादा त्वचा रोग, आंखों से संबंधित संक्रमण, एलर्जी तथा जलजनित बीमारियों के मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। इसके अलावा पीलिया के मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले करीब दस दिनों के दौरान घुमारवीं और झंडूता ब्लॉक से पीलिया के 19 मरीज उपचार के लिए सिविल अस्पताल पहुंचे। मरीजों की संख्या अचानक बढ़ने के कारण कुछ दिन पहले अस्पताल में स्थिति ऐसी बन गई थी कि एक ही बिस्तर पर दो-दो मरीजों का उपचार करना पड़ रहा था। हालांकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि अब स्थिति पहले की अपेक्षा काफी हद तक सामान्य हो चुकी है और पीलिया से संबंधित मरीजों का उपचार किया जा चुका है। चिकित्सकों के अनुसार गर्मी के कारण दूषित पानी और अस्वच्छ खानपान से बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि दस्त, उल्टी, पीलिया और अन्य संक्रमण संबंधी मामलों में वृद्धि देखने को मिल रही है। वहीं तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण त्वचा संबंधी रोग तथा आंखों में संक्रमण के मरीज भी अधिक संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। विभाग का कहना है कि गर्मी के मौसम में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पीएं और खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें। इसके अलावा दोपहर के समय तेज धूप में अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से परहेज करें तथा बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि यदि बुखार, उल्टी, दस्त, आंखों में संक्रमण, त्वचा संबंधी समस्या या पीलिया जैसे लक्षण दिखाई दें तो स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें, ताकि समय रहते उचित उपचार मिल सके और बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सके।