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Bilaspur News: सिविल अस्पताल बरठीं में चरमराई स्वास्थ्य सेवाएं

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- दो चिकित्सकों के सहारे चल रही ओपीडी और आईपीडी
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- 12 ही बिस्तर की मिल रही सुविधा, रोजाना आते हैं 200 मरीज

संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। उपमंडल झंडूता की 25 पंचायतों की आबादी के स्वास्थ्य का जिम्मा संभालने वाले सिविल अस्पताल बरठीं में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गईं हैं। अस्पताल में 6 चिकित्सकों की जगह मात्र दो चिकित्सक ही दिन-रात अपनी सेवाएं देने को मजबूर हैं, जबकि रात को इमरजेंसी के लिए नजदीकी पीएचसी से चिकित्सक बुलाने पड़ रहे हैं।
सिविल अस्पताल के मापदंडों के मुताबिक 50 बिस्तर होने चाहिए, लेकिन यहां मात्र 12 ही बिस्तर की सुविधा मिल रही है। कुछ साल पहले अस्पताल का दर्जा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से बढ़ाकर सिविल अस्पताल किया था, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ने के बजाए घटती जा रही हैं। हालात यह हैं कि पीएचसी स्तर की सुविधाएं भी लोगों को नहीं मिल पा रही हैं। इस संस्थान से पिछले सप्ताह ही एक चिकित्सक का तबादला किया गया है। इस कारण यहां दो चिकित्सक ही रह गए हैं। इस अस्पताल में प्रतिदिन करीब 200 ओपीडी होती है। इस कारण चिकित्सक के ऊपर भी काम का बोझ बढ़ता जा रहा है। इन्हीं चिकित्सकों पर भर्ती मरीजों और प्रसव की भी जिम्मेदारी भी है। अब यह अस्पताल महज एक रेफर सेंटर बनकर रह गया है। इससे क्षेत्र के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोग रोशन लाल, राजेश मेहता, मनोज कुमार, लक्खा, सुनीत सिंह, हंसराज, सतीश कुमार, दिनेश कुमार, ईश्वर ठाकुर, सुभाष चंद, नरेश कुमार, दिनेश कुमार, वासुदेव, धर्म सिंह, मदनलाल ने इसे क्षेत्र की उपेक्षा बताया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से वह अस्पताल की स्थिति सुधारने को आवाज उठाते रहे हैं। अभी तक न तो डॉक्टरों की तैनाती हुई है और न ही अस्पताल में सुविधाओं का विस्तार हुआ। उन्होंने जनता के हित में जल्द ही चिकित्सकों की तैनाती कर अस्पताल की स्थिति सुधारने की मांग सरकार से की है।
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सिविल अस्पताल के प्रभारी डॉ. अरविंद टंडन ने बताया कि दिन में दो चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं, जबकि रात को इमरजेंसी में नजदीकी पीएचसी से चिकित्सक को बुलाकर सेवाएं ली जा रही हैं। रिक्त पदों के बारे उच्च अधिकारियों को जानकारी दे दी गई है।
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