सीजीएचएस-ईसीएचएस कार्ड के लाभार्थियों को इलाज की सरकारी और निजी अस्पतालों में नहीं सुविधा
प्रदेश में आयुर्वेदिक इलाज लेने वालों को भी नहीं मिल रही कार्ड सुविधा
दूरदराज जिलों के लाभार्थियों को इलाज के लिए जाना पड़ रहा चंडीगढ़
केंद्रीय कर्मचारी, पेंशनर, पूर्व सैनिक और उनके आश्रित हो रहे प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के हजारों केंद्रीय कर्मचारी, पेंशनर और पूर्व सैनिक केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) और पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) के तहत आयुर्वेदिक इलाज के लिए आज भी दूसरे राज्यों पर निर्भर हैं। प्रदेश में इन योजनाओं के तहत सरकारी और निजी अस्पतालों की सीमित उपलब्धता के कारण उन्हें छोटी-बड़ी बीमारी के आयुर्वेदिक उपचार के लिए भी चंडीगढ़ जाना पड़ रहा है।
पहाड़ी राज्य होने के कारण यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है, जिससे लाभार्थियों को अतिरिक्त आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति से इलाज कराने वाले लाभार्थियों को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी आयुर्वेदिक अस्पतालों में उपचार तो उपलब्ध है, लेकिन सीजीएचएस और ईसीएचएस कार्ड के माध्यम से दवाइयों और उपचार का लाभ नहीं मिल पाता। यदि चिकित्सक बाहर से दवाइयां लिखते हैं, तो मरीजों को पूरा खर्च स्वयं उठाना पड़ता है और उसकी प्रतिपूर्ति भी नहीं हो पाती। स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच पहले से ही चुनौतीपूर्ण है, ऐसे में स्थानीय स्तर पर पर्याप्त अस्पताल न होने से हजारों लाभार्थियों को परेशानी हो रही है। इससे मरीजों के साथ-साथ उनके परिजनों पर भी अनावश्यक बोझ बढ़ रहा है। हिमाचल के किन्नौर, लाहौल-स्पीति, चंबा, पांगी, कुल्लू, मंडी, बिलासपुर, शिमला और अन्य जिलों के लाभार्थियों को जांच, विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श, भर्ती या फॉलोअप के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के लिए यह सफर शारीरिक रूप से भी काफी कठिन होता है। लाभार्थियों का कहना है कि प्रदेश के कई जिलों में आधुनिक सुविधाओं से लैस आयुर्वेदिक सरकारी और निजी अस्पताल मौजूद हैं। हालांकि, सीजीएचएस और ईसीएचएस के तहत इनका लाभ सीमित है। इस कारण मरीज स्थानीय स्तर पर उपचार नहीं करवा पाते हैं। नतीजतन, उन्हें चंडीगढ़ का रुख करना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है।
यह स्थिति हजारों लाभार्थियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। रक्षा लेखा विभाग से वर्ष 2021 में सेवानिवृत्त विलियम ने अपनी आपबीती साझा की। उन्होंने बताया कि सीजीएचएस और ईसीएचएस की सुविधा एक अच्छी पहल है। लेकिन, हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य की परिस्थितियों को देखते हुए इसमें सुधार की आवश्यकता है। विलियम ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में अधिकांश लाभार्थियों को इलाज के लिए चंडीगढ़ जाना पड़ता है, जबकि प्रदेश में कई सरकारी और निजी अस्पताल उपलब्ध हैं। विलियम ने यह भी बताया कि आयुर्वेदिक चिकित्सा लेने वाले लाभार्थियों को कार्ड सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्हें इलाज और दवाइयों का खर्च अपनी जेब से वहन करना पड़ता है। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होने से हजारों लाभार्थियों को राहत मिल सकती है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मांग की है कि वे प्रदेश के सरकारी और निजी आयुर्वेदिक अस्पतालों में रक्षा कर्मियों के लिए इस सुविधा को शुरू करें।