घुमारवीं अस्पताल में ईसीजी सुविधा बंद होने से मरीज हो रहे परेशान
शाम 4 बजे के बाद बंद हो जाती है ईसीजी जांच, डॉक्टर मौजूद पर जांच के साधन नहीं
रविवार रात महिला मरीज की बिगड़ी हालत, डेढ़ घंटे तक चलती रही मशक्कत
संजीव शामा
घुमारवीं (बिलासपुर)। घुमारवीं सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। अस्पताल प्रशासन जहां बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे करता है, वहीं हकीकत में मरीजों को गंभीर अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ रहा है।
सबसे बड़ी परेशानी तब सामने आती है, जब शाम 4 बजे के बाद अस्पताल में ईसीजी जैसी महत्वपूर्ण जांच सुविधा नहीं मिलती। आपातकालीन हालत में पहुंचे मरीजों को मजबूरन निजी लैब का रुख करना पड़ता है। यदि निजी लैब भी बंद हो, तो मरीज की जान खतरे में पड़ जाती है। रविवार रात ऐसी ही एक घटना में महिला मरीज की हालत गंभीर हो गई। अस्पताल में ईसीजी की सुविधा न होने के कारण तीमारदारों को अस्पताल के बाहर स्थित निजी लैब के मालिक को ढूंढने के लिए भेजा गया। घर का पता लगाने और ईसीजी करवाने में करीब डेढ़ घंटा बीत गया। इस दौरान मरीज की जान सांसत में पड़ी रही। अस्पताल में डॉक्टर आपातकालीन स्थिति में तैनात रहते हैं, लेकिन मरीज की स्थिति आंकने के लिए आवश्यक जांच सुविधाएं नहीं मिलतीं। ऐसे में मरीजों को जिला अस्पताल रेफर करना मजबूरी बन जाता है। कई बार देरी के चलते मरीज की हालत और बिगड़ जाती है। घुमारवीं जैसे बड़े शहर में ईसीजी की सुविधा केवल एक ही निजी लैब में उपलब्ध है। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल भी खड़े करती है। अस्पताल में हमेशा औसतन 15 से 20 मरीज भर्ती रहते हैं। किसी भी आपात स्थिति में परिजन निजी लैबों के चक्कर काटने के लिए मजबूर हैं। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने कई बार इस गंभीर मुद्दे की ओर ध्यान दिलाया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लोगों की मांग है कि सिविल अस्पताल घुमारवीं में 24 घंटे ईसीजी और अन्य आवश्यक जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।
कोट
सीएमओ बिलासपुर शशि दत्त शर्मा ने कहा कि घुमारवीं अस्पताल में ईसीजी मशीन तो उपलब्ध है, लेकिन अगर स्टाफ प्रशिक्षित नहीं है तो उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा। जल्द ही व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे, ताकि मरीजों को आपात स्थिति में बेहतर इलाज मिल सके।