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Bilaspur News: राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक बाल पाठशाला को मिली सीबीएसई की औपचारिक मान्यता

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कन्या पाठशाला को सीबीएसई बोर्ड के अधीन लाने की प्रक्रिया है जारी
दोनों विद्यालय होंगे क्लब, एक ही प्रशासनिक इकाई के तहत होगा संचालन
एक में आठवीं तक और दूसरे में नौवीं से 12वीं तक की चलाई जाएंगी कक्षाएं
अगले सत्र से लागू होगा नया सीबीएसई पाठ्यक्रम, सीटेट योग्य शिक्षकों को मिलेगी प्राथमिकता

संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक बाल पाठशाला घुमारवीं अब माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के अधीन हो गई है। इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। विभाग ने स्कूल प्रबंधन को सभी आवश्यक औपचारिकताएं समय पर पूरी करने के निर्देश दे दिए हैं।
जानकारी के अनुसार अब राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक बाल पाठशाला के साथ-साथ राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक कन्या पाठशाला घुमारवीं को भी बोर्ड के अधीन लाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सूत्रों का कहना है कि छात्र पाठशाला के प्रबंधन को भी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। ऐसे में यह संभावना जताई जा रही है कि दोनों स्कूलों में अब सीबीएसई प्रणाली के अनुसार शिक्षा लागू हो जाएगी। प्रस्तावित योजना के अनुसार, एक विद्यालय में आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई होगी, जबकि दूसरे में नौवीं से जमा दो तक की कक्षाएं लगाई जाएंगी। इस तरह दोनों विद्यालयों का संचालन एकीकृत प्रणाली के अंतर्गत किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को शिक्षा के हर स्तर पर निरंतरता मिलेगी और संसाधनों का भी बेहतर उपयोग हो सकेगा। शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि दोनों स्कूलों के स्टाफ, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और अन्य संसाधनों को साझा आधार पर इस्तेमाल करने की योजना है, ताकि छात्रों को अधिक सुविधाएं मिल सकें। वहीं, सीबीएसई प्रणाली लागू होने के बाद शिक्षकों की योग्यता में भी बदलाव आ सकता है, क्योंकि अब सीटेट योग्य अध्यापकों को प्राथमिकता दी जाएगी।
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इनसेट
प्रदेश में तीन स्कूलों को सीबीएसई मान्यता मिली है। इनमें शिमला जिले की राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला घणाहट्टी, लाहौल स्पीति का केलांग स्कूल शामिल है। वहीं तीसरा स्कूल बिलासपुर का घुमारवीं है।
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कोट
घुमारवीं क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में एक बड़ा सुधार है। सरकार का लक्ष्य सरकारी स्कूलों को आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ना है। घुमारवीं के दोनों विद्यालयों को क्लब कर सीबीएसई ढांचे में शामिल करने से क्षेत्र के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा और प्रतिस्पर्धात्मक माहौल मिलेगा। इससे विद्यार्थियों को न केवल बेहतर अध्ययन सामग्री और मूल्यांकन प्रणाली मिलेगी, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी बड़ी मदद मिलेगी।
राजेश धर्माणी, तकनीकी शिक्षा मंत्री
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