भूमि अधिग्रहण इकाई ने माना-इंतकालों में करूकान दर्ज नहीं, कई रिकॉर्ड अपठनीय
दुरुस्ती के लिए तहसीलदार झंडूता को निर्देश, अन्य मुहालों में भी सुधार की तैयारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना से प्रभावित क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण से जुड़े राजस्व अभिलेखों में व्यापक स्तर पर त्रुटियां सामने आई हैं। मौजा धराड़सानी, छत, भटेड़, महरोईयां, कोठी, बैहलग, बैहना जट्टां और कल्लर सहित विभिन्न मुहालों के अनेक खसरा नंबरों में पाई गई इन गड़बड़ियों को भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई ने अपने आधिकारिक पत्राचार में स्वीकार किया है।
इकाई के अनुसार केंद्र के पक्ष में दर्ज व तस्दीक किए गए इंतकालों के विभिन्न खसरा नंबरों में कई स्थानों पर करूकान दर्ज नहीं किए गए हैं। इसके अतिरिक्त कई करूकानों का विभाजन कर अलग-अलग इंतकाल भी दर्ज नहीं किए गए। इससे संबंधित भूमि अभिलेखों की सटीकता और पारदर्शिता प्रभावित हुई है। इकाई ने यह भी स्पष्ट किया है कि कई खसरा नंबरों से संबंधित राजस्व रिकॉर्ड पढ़ने योग्य नहीं हैं, जिससे अभिलेखों की जांच और सत्यापन में कठिनाई उत्पन्न हो रही है। विशेष इकाई ने यह भी उल्लेख किया है कि इन त्रुटियों को नियमानुसार दुरुस्त करने की शक्तियां उनके कार्यालय में उपलब्ध भू-अर्जन अधिकारी के पास थीं। इस संबंध में इकाई द्वारा पत्र संख्या 318 दिनांक 28 अप्रैल 2026 जारी कर तहसीलदार झंडूता को निर्देशित किया गया है। इसमें तहसीलदार के पूर्व पत्र संख्या जेएचडीओ/2026-81-84 दिनांक 27 फरवरी 2026 का हवाला देते हुए सभी संबंधित मुहालों के खसरा नंबरों की प्रस्तावना तैयार कर नियमों के अनुसार दुरुस्ती करने तथा इसकी अनुपालना रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत अब यह देखा जाना है कि संबंधित तहसीलदार किस अधिनियम की किस धारा एवं उपधारा के अंतर्गत इन त्रुटियों की दुरुस्ती करते हैं और इसकी रिपोर्ट भू-अर्जन अधिकारी को प्रेषित करते हैं। दुरुस्ती की यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद अन्य क्षेत्रों में भी इसी प्रकार की कार्रवाई की संभावना जताई गई है।
इसी क्रम में संकेत दिए गए हैं कि तहसील घुमारवीं के 13 मुहालों, सदर क्षेत्र के 5 मुहालों तथा श्री नयनादेवी जी के स्वारघाट क्षेत्र के 10 मुहालों में भी इसी प्रकार की त्रुटियों की जांच कर दुरुस्ती करवाई जा सकती है। हालांकि अभी तक यह स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है कि इन त्रुटियों का इंतकालों के साथ संलग्न नक्शों तथा मौके पर मौजूद खसरा नंबरों पर कोई प्रभाव पड़ा है या नहीं। इस विषय में विस्तृत तकनीकी जांच और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। वहीं, संबंधित पक्षों द्वारा राज्य सरकार, जिला प्रशासन तथा भू-अर्जन अधिकारी को भेजे गए 57वें रिमांडर के संदर्भ में भी अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इन त्रुटियों का राजस्व अभिलेखों पर वास्तविक प्रभाव क्या पड़ा है। ऐसे में आने वाले समय में इस पूरे प्रकरण पर प्रशासनिक स्तर पर विस्तृत स्पष्टता आने की उम्मीद जताई जा रही है।