10 साल पुराने मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत ने दिया फैसला
25 गवाह पेश, लेकिन अहम गवाहों ने नहीं दिया साथ, शिकायतकर्ता के बयान में विरोधाभास
2016 में शराब ठेके पर हमला और तोड़फोड़ का था मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत ने वर्ष 2016 के मारपीट व तोड़फोड़ के एक मामले में सभी पांच आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। यह फैसला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 25 मार्च 2026 को सुनाया। मामला थाना भराड़ी में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
अभियोजन के अनुसार 18 मई 2016 की रात करीब 10:45 बजे देहरा सुनाहल क्षेत्र में शराब के ठेके के पास 10-12 लोगों ने शिकायतकर्ता और उसके साथियों पर डंडों व लोहे की रॉड से हमला किया। आरोप था कि हमलावरों ने ठेके में घुसकर तोड़फोड़ भी की और लोगों को घायल कर दिया। अदालत में अभियोजन पक्ष ने 25 गवाह पेश किए, लेकिन मामले के प्रमुख गवाह अपने पहले बयानों से मुकर गए। उन्होंने न तो आरोपियों की पहचान की पुष्टि की और न ही घटना का समर्थन किया। अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता अशोक कुमार के बयान में भी कई विरोधाभास थे। प्रारंभिक बयान में केवल दो आरोपियों के नाम थे, जबकि बाद में अन्य नाम जोड़े गए। इसे अदालत ने केस की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा करने वाला माना। अदालत ने कहा कि अभियोजन आरोपियों की भूमिका स्पष्ट रूप से साबित नहीं कर पाया, मेडिकल साक्ष्य को आरोपियों के कृत्य से जोड़ने में कमी रही,
पूरे मामले में संदेह की स्थिति बनी रही। इन सभी तथ्यों को देखते हुए अदालत ने पांचों आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने आरोपियों के निजी मुचलके रद्द करने और केस संपत्ति को नियमानुसार नष्ट करने के आदेश भी दिए।