बिलासपुर। जिले में विभिन्न मत्स्य सहकारी सभाओं के साथ जुड़े मछुआरों को अब महीने में 25 दिन और साल में 250 दिन तक मछली का शिकार करना होगा। ऐसा न करने पर मछुआरों के लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे। इस संबंध में मत्स्य विभाग की ओर से राज्य के सभी जिलों को निर्देश जारी किए जा चुके हैं। बिलासपुर जिला में ही लगभग 3 हजार परिवार मछली के शिकार पर निर्भर हैं।
हाल ही में बिलासपुर के घागस स्थित एशिया के सब से बड़े मत्स्य प्रजनन सेंटर में मछुआरों के साथ हुई बैठक में भी मत्स्य विभाग के निदेशक ने साफ कर दिया है कि मछुआरों को हर हाल में महीने के 25 दिन तक मछली का शिकार करना होगा। ऐसा न करने पर उनके लाइसेंस रद्द किए जाएंगे। इसका कुछ सहकारी सभाओं ने विरोध भी किया। सभाओं का कहना था कि बिलासुपर क्षेत्र में गोबिंदसागर में पानी का स्तर जल्दी कम हो जाता है। ऐसे में हर महीने 25 दिन तक मछली का शिकार करना संभव नहीं है। जिसमें निदेशक ने आश्वासन दिया कि अगर इस प्रकार की कोई समस्या होगी तो उस संबंध में मत्स्य सहकारी सभाएं लिख कर दे सकती हैं। जिस पर विभाग गौर करेगा।
इधर,मत्स्य विभाग के निदेशक सतपाल मेहता ने बताया की नियम अनुसार हर मछुआरे को महीने में कम से कम 25 दिन तक मछली पकड़ी होगी। साल में 250 दिन मछुआरों को मछली पकड़नी होती है। ऐसा न करने पर विभाग की ओर से मछुआरों का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा, लेकिन उन्होंने का कि विभाग विशेष हालात में इस में छूट दे सकता है।