बिलासपुर। जिला में मत्स्य आखेट पर पहले कोरोना और अब मौसम की मार पड़ी है। जिससे जिले के करीब 2326 परिवारों पर रोजी-रोटी का संकट खड़ुा हो गया है। हालांकि मत्स्य आखेट बंद होने के दो महीनों के दौरान सरकार से इन मछुआरों को आर्थिक सहायता दी जाती है, लेकिन वह भी सहायता राशि इनके परिवारों की रोजी के लिए नाकाफी है।
इस बार मानसून के देरी से दस्तक देने से मछली पकड़ने पर विभाग ने 15 अगस्त तक प्रतिबंध लगाया है। हर साल एक जून से इसे बंद कर दिया जाता था और एक अगस्त को आखेट शुरू कर दिया जाता था, लेकिन इस साल मानसून के देरी से आने से विभाग ने समय सारिणी में बदलाव किया है। ऐसे में आखेट पर 16 जून तक लगा प्रतिबंध जोकि अब 15 अगस्त तक रहेगा।
बताते चलें कि जिला में 2326 पविार ऐसे हैं, जिनका जीवन यापन इस कारोबार पर निर्भर है। मार्च 22 से अप्रैल 20 तक यह कारोबार कोरोना के कारण बंद रहा। जिससे उक्त सभी परिवार प्रभावित हुए।
हालांकि सरकार ने मछुआरों को कोरोना काल में हुई आर्थिक क्षति की भरपाई के लिए हाल ही में राहत राशि भी वितरित की। मछुआरों का कहना है कि कार्य बंद होने के चलते जो राहत राशि सरकार द्वारा उन्हें सौंपी जाती है वो परिवार चलाने के लिए काफी नहीं है। रिष्ट फंड सदस्य मुनीर अख्तर लाली ने बताया कि इस कारोबार से जो भी कमाई मछुआरों को होती है वो साथ में ही परिवार खर्च में खत्म हो जाती है। जिसके कारण इन दिनों परिवार चलाना मुश्किल हो जाता है। सरकार को मछुआरों की राहत राशि में बढ़ोत्तरी करनी चाहिए।
बरसात के दो माह मछली प्रजनन के होते हैं। पहले जून से 1 अगस्त तक मछली आखेट पर प्रतिबंध होता था। लेकिन अब बरसात देरी से होने के कारण इसके समय में बदलाव किया गया है। वहीं प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत केंद्र और प्रदेश सरकार की तरफ से प्रतिबंध के दौरान मछुआरों को राहत राशि प्रदान की जाती है। सरकार की तरफ से 2 हजार और 1 हजार मछुआरों द्वारा जमा किए गए अंशदान को मिलाकर 3 हजार प्रति परिवार दिए जाते हैं।
मत्स्य विभाग द्वारा जुलाई से लेकर अक्तूबर माह तक झील में मछली का बीज डाला जाता है। इस बार गोबिंद सागर झील में 25 लाख रूपये का मछली का बीज डाला जाएगा। मछुआरों की राहत राशि के लिए केंद्र सरकार को प्रपोजल भेजा है। इसके तहत हर परिवार को 3 हजार रूपये सहायता दी जाती है। -सतपाल मेहता, निदेशक एवं प्रारक्षी मत्स्य विभाग