जिले में उत्साह पूर्वक मनाया ईद-उल-फितर त्योहार, अमन, शांति सुरक्षा के लिए की गई दुआएं
-मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अदा की विशेष नमाज
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में ईद की नमाज शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। अल्लाह की बारगाह में लाखों लोगों ने सजदा किया। मुल्क में अमन और कौम की तरक्की के लिए दुआ मांगी गई। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी।
जिले में जामा मस्जिद रौड़ा, बरठीं, घुमारवीं, झंडूता, टकरेड़ा, चकली, कोठीपुरा में लोगों ने नमाज अदा की। मस्जिदों में सुबह से ही समुदाय के बच्चे, बूढ़े और जवान सजधज कर पारंपरिक परिधान कुर्ता पजामा और टोपी पहने भारी संख्या में पहुंचे। अमीर-गरीब, छोटे-बड़े और दोस्त व दुश्मन का अंतर मिटाते हुए एक साथ नमाज अदा की। जामा मस्जिद बिलासपुर में मुफ्ती मोहम्मद असरान मुजाहिरी ने नमाज से पूर्व ईद-उल-फितर के महत्व पर सभी को जानकारी दी। नमाज के दौरान उन्होंने देश में अमन- चैन, शांति, खुशहाली और सभी की सुरक्षा की विशेष दुआ की। नमाज के दौरान सद्भावना, भाईचारा और धार्मिक सौहार्द के लिए दुआएं कीं। मान्यता है कि ईद के मौके की दुआएं देर-सबेर जरूर पूरी होती हैं। नमाज के बाद लोगों ने एक दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी। वहीं फितराना की राशि भी जरूरतमंदों में बांटी गई। प्रथम ईद पैगंबर मुहम्मद ने 624 ईस्वी में लोगों संग मनाई थी। जिला मुस्लिम वेलफेयर कमेटी प्रधान नसीम मोहम्मद, संयोजक गुलाम मुहयूद्दीन और प्रदेश अध्यक्ष अबीब खान ने बताया कि ईद इनाम का दिन भी है। ईद की नमाज में गुनाह पतझड़ में पेड़ों से झड़ रहे पत्तों की तरह नमाजी से हट जाते हैं। यह पवित्र त्योहार भाईचारा निभाने का प्रतीक है। इससे मिल-जुलकर रहने की प्रेरणा मिलती है। त्योहार त्याग व समर्पण को दर्शाता है और मोहब्बत का पैगाम भी है। छोटे बच्चे बड़ों से ईदी के रुपये लेना आज नहीं भूले हैं। हिमाचली मुस्लिम वेलफेयर महासभा और जिला मुस्लिम वेलफेयर कमेटी के पदाधिकारियों ने सभी को इस अवसर पर मुबारकबाद दी।