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Bilaspur News: नाल्टी के किसानों ने टमाटर से कमाए सात लाख, खेती को बनाया रोजगार का जरिया

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रिशु चन्देल
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30 बीघा में की व्यावसायिक खेती, 50 टन उत्पादन से हुई 11 लाख की आमदनी
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शिक्षित बेरोजगार ने पारंपरिक खेती छोड़ अपनाई आधुनिक सब्जी उत्पादन की राह
1.05 लाख पौधों से तैयार हुई टमाटर की फसल, प्रदेश से बाहर की मंडियों तक पहुंचाई उपज

संदीप कुमार
बम्म (बिलासपुर)। उपमंडल घुमारवीं की ग्राम पंचायत मैहरी काथला के नाल्टी गांव के युवाओं ने व्यावसायिक खेती के क्षेत्र में नई मिसाल पेश की है। शिक्षित बेरोजगार ने पारंपरिक खेती से हटकर बड़े स्तर पर टमाटर का उत्पादन किया और महज तीन माह में करीब सात लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया। किसानों की मेहनत ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक तकनीक और सामूहिक प्रयास से खेती भी रोजगार का मजबूत माध्यम बन सकती है।
नाल्टी गांव के किसानों ने करीब 30 बीघा भूमि में टमाटर की व्यावसायिक खेती शुरू की। इसके लिए उन्होंने 1.25 लाख पौधे लगाए थे। हालांकि मौसम की मार के कारण करीब 20 हजार पौधे खराब हो गए, लेकिन शेष 1.05 लाख पौधों से करीब 50 टन टमाटर का उत्पादन हुआ। इस फसल से युवाओं को करीब 11 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई। खेती, मजदूरी और अन्य कार्यों पर लगभग दो लाख रुपये खर्च हुए, जबकि लगातार बारिश के कारण करीब दो लाख रुपये की फसल खराब हो गई। इसके बावजूद किसानों ने लगभग सात लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया। किसानों ने बताया कि टमाटर की व्यावसायिक खेती का विचार उन्हें मंडी जिले के बल्ह क्षेत्र से मिला, जो टमाटर उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। खेती के दौरान थुनाग क्षेत्र के किसान दिनेश और राजकुमार ने उन्हें फसल प्रबंधन, रोग नियंत्रण और आधुनिक तकनीकों की जानकारी देकर मार्गदर्शन किया। किसानों के अनुसार इस सीजन में सबसे बड़ी चुनौती मौसम रही। समय से पहले शुरू हुई बरसात के कारण काफी फसल खराब हुई। उनका कहना है कि यदि रोपाई दो माह पहले की जाती तो नुकसान को कम किया जा सकता था। इसके अलावा जंगली जानवरों से फसल बचाने के लिए पूरे क्षेत्र की बाड़बंदी करनी पड़ी। सिंचाई के लिए किसानों ने निजी बोरवेल और खड्ड से पंप लगाकर पानी की व्यवस्था की। उन्होंने बताया कि नाल्टी गांव की सिंचाई योजना लंबे समय से बंद पड़ी है। यदि यह योजना दोबारा शुरू हो जाए तो आसपास के कई किसान व्यावसायिक सब्जी उत्पादन से जुड़ सकते हैं।
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पहली बार बड़े स्तर पर खेती करने वाले इन बेरोजगारों ने अपनी उपज को बाजार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी खुद संभाली। उन्होंने टमाटर को राजस्थान के अलवर और बीकानेर सहित चंडीगढ़, जालंधर और नेरचौक की मंडियों तक पहुंचाया। स्थानीय बाजार में भी टमाटर की अच्छी मांग रही। तैयार हुए टमाटरों का अधिकतम वजन करीब 150 ग्राम तक रहा, जिसे व्यापारियों ने बेहतर गुणवत्ता का बताया। किसानों ने बताया कि अगले सीजन में टमाटर के साथ खीरा, घिया, शिमला मिर्च और बैंगन जैसी सह फसलों का उत्पादन भी किया जाएगा। इससे उत्पादन लागत कम करने और आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी। संवाद
आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से मिले बेहतर परिणाम
किसान मनोज कुमार ने बताया कि पहली बार इतने बड़े स्तर पर टमाटर की खेती का प्रयास किया गया। शुरुआत में मौसम और अन्य चुनौतियां आईं, लेकिन सही प्रबंधन और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से बेहतर परिणाम मिले। उन्होंने कहा कि युवा खेती को स्वरोजगार के रूप में अपनाकर अच्छी आमदनी हासिल कर सकते हैं।
आपसी सहयोग से किया काम
अशोक चंदेल ने बताया कि सभी युवाओं ने मिलकर खेती की योजना तैयार की और आपसी सहयोग से काम किया। बड़े स्तर पर खेती करने से अनुभव भी मिला और हौसला भी बढ़ा। उन्होंने कहा कि किसानों को नई तकनीक और बाजार की जानकारी के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
क्षेत्र में सब्जी उत्पादन को मिला बढ़ावा
रवींद्र चंदेल ने बताया कि केवल उत्पादन करना ही काफी नहीं है, बल्कि फसल को सही बाजार तक पहुंचाना भी जरूरी है। युवाओं ने खुद संपर्क कर टमाटर को विभिन्न मंडियों तक पहुंचाया, जिससे बेहतर दाम प्राप्त हुए। उन्होंने कहा कि सड़क सुविधा बेहतर होने से क्षेत्र में सब्जी उत्पादन को और बढ़ावा मिलेगा।
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पानी, तकनीक और बेहतर प्रबंधन से खेती सफल
रिशु चंदेल ने बताया कि टमाटर की खेती से उनका खेती के प्रति नजरिया बदला है। उन्होंने कहा कि पानी, तकनीक और बेहतर प्रबंधन उपलब्ध हो तो पहाड़ी क्षेत्रों में भी व्यावसायिक खेती सफल हो सकती है। आने वाले समय में अन्य सब्जियों का उत्पादन बढ़ाने की योजना है।

रिशु चन्देल

रिशु चन्देल

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