बिलासपुर। एसीसी सीमेंट फैक्ट्री बंद होने से केवल जिले के ट्रक ऑपरेटर प्रभावित नहीं हुए हैं। उनके साथ मैकेनिक, टायर पेंचर, चाय की दुकान करने वाले, ढाबा चलाने वाले छोटे कारोबारी बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। हालात यह है कि जो छोटा दुकानदार दिन में 1000 रुपये का काम करता था, वे अब पूरे दिन में 100 रुपये की कमाई भी नहीं कर पा रहा है। जिले की 70 फीसदी आर्थिकी ट्रकों के कारोबार से जुड़ी है।
एसीसी सीमेंट फैक्ट्री बरमाणा में द बिलासपुर जिला ट्रक ऑपरेटर सहकारी सभा बरमाणा (बीडीटीएस) और पूर्व सैनिकों के करीब 3800 ट्रक माल ढुलाई का कार्य करते हैं। इन ट्रकों से न केवल ट्रक ऑपरेटरों, ट्रक चालकों और परिचालकों, बल्कि स्वारघाट से लेकर सलापड़ पुल तक चाय की दुकान, ढाबा चलाने वालों, टायर पेंचर, मैकेनिकों की आर्थिकी भी निर्भर है।
इन दुकानदारों की 90 फीसदी कमाई ट्रक चलने से ही होती है, लेकिन पिछले 14 दिन से उक्त सभी ट्रकों के पहिए थमे हैं, जिससे इनकी आमदनी भी पूरी तरह से बंद हो गई है। हाईवे पर इक्का दुक्का गाड़ी वाले इन दुकानों पर रुकते हैं, जिससे दिन में 100-150 रुपये तक की कमाई इनकी हो जाती है।
ग्राहकों का इंतजार करते रहते हैं मैकेनिक
बरमाणा में ऑटो मैकेनिक का कार्य करने वाले देश राज ने कहा कि बरमाणा में ट्रक चलते थे, तो वो दिन में 1000-1500 रुपये कमाई होती थी। परिवार की रोजी रोटी इसी दुकान से चलती है, लेकिन जब से ट्रकों का काम बंद हुआ है, तब से काम खत्म हो गया है। दिन भर ग्राहकों का इंतजार करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा ही रहा, तो आर्थिक हालत और खराब होगी।
100 लोग खाना खाते थे, अब 10 भी नहीं आ रहे
पंडित ढाबा संचालक घन श्याम ने कहा कि पूरा कारोबार ट्रकों पर निर्भर है। कहा कि जब एसीसी फैक्ट्री चलती थी तो दिन भर में 100 से ज्यादा खाने लगते थे, लेकिन अब 10 फीसदी काम भी नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि ट्रकों के पहिए थमने से पूरे बाजार का कारोबार थम गया है। इसके अलावा
चाय अब कोई पीता नहीं, जमा किए पैसों से चल रहा घर खर्च
हलवाई की दुकान करने वाले गुरमीत ने बताया कि सबसे ज्यादा दिन भर में चाय का काम होता था। चाय के साथ ट्रक चालक/परिचालक मिठाई, पकौड़े व समोसे भी खाते थे, लेकिन अब सारा काम ठप है। कमाई 10 फीसदी रह गई है। घर का खर्च जमा पूंजी से चलाना पड़ रहा है।