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Bilaspur News: स्वारघाट में फायर चौकी न होने से लोग खुद करते हैं मशक्कत

Fri, 24 Oct 2025 05:38 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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आग लगने की घटना पर बचाव दल के पहुंचने में लग जाते हैं कई घंटे
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भौगोलिक स्थिति और बढ़ती आबादी के चलते क्षेत्र में फायर चौकी जरूरी

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। स्वारघाट क्षेत्र में फायर ब्रिगेड की चौकी न होने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यहां किसी भी अग्निकांड या अन्य हादसे की स्थिति में राहत और बचाव दल के मौके पर पहुंचने में घंटों लग जाते हैं। ऐसे में लोगों को आग बुझाने के लिए खुद मशक्कत करनी पड़ती है। स्वारघाट से नजदीकी फायर स्टेशन बिलासपुर या श्री नयना देवी जी में है। इस कारण कई बार छोटी आग भी विकराल रूप ले लेती है। स्वारघाट में रोजाना भारी वाहनों का आवागमन रहता है।
नेशनल हाईवे पर ट्रक और तेल टैंकरों की लगातार आवाजाही के कारण दुर्घटना या आग लगने का खतरा हमेशा बना रहता है। कुछ सालों में कई ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें फायर ब्रिगेड को पहुंचने में देर हुई और भारी नुकसान उठाना पड़ा। स्थानीय व्यापारी वर्ग और गृहणियों का कहना है कि किसी भी अनहोनी की स्थिति में वे खुद बाल्टी और पाइप से आग बुझाने की कोशिश करते हैं क्योंकि मदद समय पर नहीं पहुंच पाती। जिला परिषद के उपाध्यक्ष मानसिंह धीमान ने इस गंभीर समस्या को उठाते हुए कहा कि स्वारघाट की भौगोलिक स्थिति और बढ़ती आबादी को देखते हुए यहां फायर चौकी की स्थापना अत्यंत जरूरी है। उन्होंने बताया कि स्वारघाट की दूरी श्री नयना देवी जी से लगभग 20 किलोमीटर और बिलासपुर मुख्यालय 35 किलोमीटर से भी दूर है। ऐसे में किसी आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य शुरू करने में काफी देरी होती है, जिससे नुकसान बढ़ जाता है। उन्होंने विभाग से इस संबंध में ताजा स्थिति की जानकारी मांगी है।
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प्रभारी अग्निशमन केंद्र बिलासपुर के अनुसार, इस विषय को वर्ष 2024 में ही निदेशक अग्निशमन सेवाएं हिमाचल प्रदेश के संज्ञान में लाया जा चुका है। 18 अगस्त 2025 के माध्यम से विभाग ने जानकारी दी है कि स्वारघाट में फायर चौकी स्थापित करने का प्रस्ताव भेजा गया था, परंतु अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। स्थानीय लोगों ने कहा कि स्वारघाट की बढ़ती जनसंख्या, फोरलेन की स्थिति को देखते हुए यहां तत्काल फायर चौकी का निर्माण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कोई दुर्घटना होती है तो बिलासपुर या नयना देवी से गाड़ियां आने में औसतन एक से डेढ़ घंटा लग जाता है, तब तक सब कुछ जलकर राख हो सकता है।
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