-एम्स बिलासपुर में धूमधाम से मनाया गया अंतरराष्ट्रीय रेडियोलॉजी दिवस
-क्षय किरणों के नुकसान और उनसे बचाव के उपायों के बारे में दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एम्स बिलासपुर के रेडियोलॉजी विभाग ने अंतरराष्ट्रीय रेडियोलॉजी दिवस धूमधाम से मनाया। इस दिन क्षय किरणों का आविष्कार किया गया था, जो चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खोज साबित हुई। क्षय किरणों का उपयोग एक्स-रे, फ्लुओरोस्कोपी, डीएसए, सीटी स्कैन जैसे चिकित्सा उपकरणों में होता है, जो रोगों का पता लगाने और उनका उपचार करने में सहायक होते हैं।
इस अवसर पर एम्स बिलासपुर के कार्यकारी निदेशक प्रो. वीर सिंह नेगी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में डीन अकादमिक प्रो. रूपाली, डीन रिसर्च प्रो. अनुपम, डीन परीक्षा प्रो. निधि पूरी और चिकित्सा अधीक्षक प्रो. दिनेश वर्मा भी शामिल हुए। रेडियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. नरवीर सिंह चौहान ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किया, अन्य अतिथियों को भी सम्मानित किया। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रेडियोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित की गई प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता रही। इसमें प्रतिभागियों ने रेडियोलॉजी के विभिन्न पहलुओं पर अपने ज्ञान का प्रदर्शन किया। इस कार्यक्रम में डॉ. वरुण बंसल ने क्षय किरणों के नुक़सान और उनसे बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दी।
डॉ. लोकेश ने बताया कि कैसे रेडियोलॉजी पूरी दुनिया में मानवता के लाभ के लिए काम कर रही है और कैसे रेडियोलॉजी विभाग यहां आने वाले मरीजों की सेवा में अहम भूमिका निभा रहा है। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि ने पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया। डॉ.अरमान गुप्ता को सर्वश्रेष्ठ रेजीडेंट, अभिनव शर्मा को सर्वश्रेष्ठ तकनीशियन के रूप में सम्मानित किया गया। उन्हें डब्ल्यू सी रेंटजन पुरस्कार 2024 से नवाजा गया। मुख्य अतिथि ने विभाग की कार्यप्रणाली की सराहना की और वहां कार्यरत सभी कर्मचारियों को उनके समर्पण और कड़ी मेहनत के लिए प्रोत्साहित किया। इस अवसर पर एम्स में बिलासपुरी धाम भी परोसी गई। इस कार्यक्रम ने रेडियोलॉजी के महत्व को उजागर किया। इस क्षेत्र में कार्यरत चिकित्सकों और विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।