तीन दिवसीय कार्यशाला में मरीजों से बातचीत, डेटा जुटाने और निष्कर्ष तैयार करने का दिया प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एम्स बिलासपुर में चिकित्सा क्षेत्र में शोध को प्रभावी बनाने के लिए तीन दिवसीय गुणात्मक शोध कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें डॉक्टरों, नर्सिंग, लैब मेडिसिन और कम्युनिटी मेडिसिन से जुड़े 22 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में मरीजों और समुदाय से जानकारी जुटाने से लेकर डेटा के विश्लेषण और शोध निष्कर्ष तैयार करने तक की प्रक्रिया समझाई गई।
विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को इन-डेप्थ इंटरव्यू और फोकस ग्रुप डिस्कशन जैसी शोध तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। बताया गया कि मरीजों और समुदाय के अनुभवों को शोध में शामिल करते समय किन पहलुओं का ध्यान रखना जरूरी है। प्रतिभागियों ने विस्तृत बातचीत और समूह चर्चा के माध्यम से जानकारी जुटाने, उसे व्यवस्थित करने और उसमें छिपे महत्वपूर्ण विषयों व पैटर्न की पहचान करने का अभ्यास किया।
कार्यशाला के पहले दिन शोध के मूल सिद्धांतों, अध्ययन की रूपरेखा और शोधकर्ता की भूमिका पर चर्चा हुई। दूसरे दिन डेटा जुटाने और उसके विश्लेषण की तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। अंतिम दिन डेटा की व्याख्या, शोध में नैतिक पहलुओं और शोध पत्र तैयार करने की प्रक्रिया बताई गई।
कार्यशाला में पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के पूर्व प्रोफेसर एवं कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. डॉ. राजेश कुमार, पूर्व प्रोफेसर ऑफ हेल्थ प्रमोशन प्रो. डॉ. मनमीत कौर, दिल्ली विश्वविद्यालय के मानव विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चक्रवर्ती महाजन और बंगलूरू स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ की सहायक प्रोफेसर डॉ. मीना पुट्टुराज ने प्रशिक्षण दिया। विशेषज्ञों ने व्याख्यान के साथ समूह अभ्यास और चर्चा के माध्यम से शोध की बारीकियां समझाईं।
एम्स बिलासपुर के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह (सेवानिवृत्त) के मार्गदर्शन में शोध अनुभाग ने नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज के सहयोग से कार्यशाला का आयोजन किया। आयोजन समिति में प्रो. डॉ. अनुपम पाराशर, प्रो. डॉ. पूजन डोगरा, डॉ. नीलम वर्मा और डॉ. नवप्रीत शामिल रहे।