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दर्द से कहराते रहे मरीज, मगर नहीं पसीजा डॉक्टरों का दिल

Mon, 09 May 2016 10:58 PM IST
अभिषेक सोनी / बिलासपुर
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दोपर करीब 12-15 बजे बिलासपुर अस्पताल में ओपीडी के बाहर चिकित्सक का इंतजार करती महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
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बिलासपुर। दिन सोमवार...समय 12:45 स्थान बिलासपुर का जिला अस्पताल। अस्पताल खुले करीब ढाई घंटे का समय हो चुका था और सामान्य ओपीडी के बाहर दूर-दराज क्षेत्रों से आए सैकड़ों मरीजों की कतारें लगी थीं। लेकिन ओपीडी में कोई चिकित्सक मौजूद नहीं। दर्द और बीमारी से बेहाल मरीज ओपीडी के बाहर डॉक्टर के आने का इंतजार कर रहे थे। लेकिन चिकित्सकों ने ओपीडी में आना जरूरी ही नहीं समझा।
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हालात ऐसे थे कि कई मरीज ओपीडी के बाहर ही दर्द से कहराते हुए जमीन पर ही लेट गए थे। मगर फिर भी डॉक्टर का दिल नहीं पसीजा। हैरानी इस बात की है कि इस बारे में अस्पताल के उच्च अधिकारियों को भी सूचित किया गया लेकिन इसके बावजूद ओपीडी में डॉक्टर ओपीडी में मरीजों का उपचार करने नहीं आए। ऐसे में मरीज दर्द से तड़पते रहे और अस्पताल की व्यवस्थाओं को कोसते रहे।

समय-दोपहर के करीब डेढ़ बजे का था, थक हार के कई लोगों ने निजी क्लीनिकों की ओर रुख किया, लेकिन जो लोग निजी क्लीनिकों में नहीं जा सकते थे, वह अपने दर्द को साथ लिए घर की ओर चल दिए। जानकारी के मुताबिक सामान्य महिला ओपीडी में डॉ. शैली की ड्यूटी होती है, लेकिन सोमवार को उनका नाइट ऑफ था, जबकि पुरुष ओपीडी में डॉ. सांख्यान और डॉ. संजय चंदेल की ड्यूटी थी।
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लेकिन वह ओपीडी में दोपहर पौने एक बजे तक मौजूद नहीं थे। चिकित्सकों के ओपीडी में न होने से मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। मरीजों में कई बुजुर्ग ऐसे भी थे, जो सुबह साढ़े नौ बजे से ओपीडी के बाहर बैठकर चिकित्सकों के आने का इंतजार कर रहे थे। लोगों का कहना है कि मरीजों की सुविधा के लिए तैनात चिकित्सक लापरवाही से कार्य कर रहे हैं। यदि कोई चिकित्सक छुट्टी या लीव पर है, तो इसकी जानकारी मरीजों को मुहैया करवाई जानी चाहिए।

सुबह से इंतजार करते रहे मगर नहीं आए डॉक्टर
सोमवार को अस्पताल में दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे मरीजों में निचला कोह (गंभरपुल) के चंपा देवी, मारकंड के राजेंद्र, कोटधार के तेज सिंह, बिजड़ के ज्योति, बरठीं के जीत राम और सुई-सुराहड़ के बाबू राम सहित अन्यों ने बताया कि सुबह से चिकित्सकों का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन दोपहर तक ओपीडी में डॉक्टर नहीं बैठे हैं। गर्मी से बुरा हाल हो चुका है, लेकिन मरीजों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अधिकतर तौर पर ओपीडी में चिकित्सक तैनात नहीं होते हैं, जिससे लोग परेशान हैं। समस्या को लेकर अस्पताल प्रशासन को भी सूचित किया गया है, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ है।

साढ़े 11 बजे के बाद नहीं बनती मरीजों की पर्ची
पंजगाईं के डॉ. विकास गौतम, कुड्डी (घागस) के रवि, राजपुरा के बाबू राम और कंदरौर की डोलमा देवी के साथ-साथ कई मरीजों का कहना था कि मेडिसन ओपीडी में अव्यवस्थाओं की भरमार है। यहां सुबह साढ़े 11 बजे के बाद पर्ची नहीं ली जाती है। इससे मरीज काफी परेशान रहते है। उन्होंने बताया कि यहां पर चिकित्सक करीब 12:20 बजे आए। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी। अस्पताल प्रशासन भी मरीजों की समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

महिला ओपीडी में तैनात चिकित्सक का नाइट ऑफ था, जबकि पुरूष ओपीडी में चिकित्सक मौजूद थे। अन्य ओपीडी में डॉक्टर तैनात रहे। मरीजों की संख्या अधिक होने के चलते कभी-कभार समस्या हो जाती है।
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                                             ....डॉ. सतीश शर्मा, एसएमओ क्षेत्रीय अस्पताल, बिलासपुर।
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