श्रीराम नाटक का मंचन 11 से, इस बार रौड़ा में होगा दशहरा
नवीन सोनी राम तो रिशव उर्फ रिशु लक्ष्मण की निभाएंगे भूमिका, दूसरे धर्मों के कलाकार भी निभाएंगे किरदार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बन चुके 136 साल पुराने ऐतिहासिक श्रीराम नाटक का मंचन 11 अक्तूबर से डियारा सेक्टर में शुरू होगा। श्रीराम नाटक समिति ने मंचन को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार अनुभवी कलाकारों के साथ नए चेहरों को भी मंच पर मौका दिया गया है।
डियारा का श्रीराम नाटक सिर्फ धार्मिक मंचन नहीं, बल्कि बिलासपुर की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता की 136 साल पुरानी परंपरा का हिस्सा है। समिति की ओर से हर वर्ष मंचन पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। मंच सज्जा, प्रकाश, ध्वनि और वेशभूषा समेत अन्य व्यवस्थाओं के माध्यम से मंचन को भव्य रूप देने का प्रयास किया जाता है।
बिलासपुर शहर में दशहरा आयोजन की भी वर्षों पुरानी परंपरा है। एक साल डियारा और दूसरे साल रौड़ा में दशहरा आयोजित किया जाता है। इस वर्ष दशहरा रौड़ा में होगा। डियारा में 11 अक्तूबर से श्रीराम नाटक का मंचन शुरू होगा। इसमें रामायण के विभिन्न प्रसंगों को मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।
युवाओं को जोड़ने की पहल
समिति ने इस बार भी युवा कलाकारों को मंच देने का निर्णय लिया है। नवीन सोनी भगवान श्रीराम, रिशव उर्फ रिशु लक्ष्मण, गोपाल रावण और सूरज पाटिल माता सीता की भूमिका निभाएंगे। समिति का प्रयास है कि 136 साल पुरानी परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ा जाए और युवाओं को अभिनय के लिए मंच उपलब्ध कराया जाए।
दूसरे धर्मों के कलाकार भी निभाते हैं किरदार
डियारा के श्रीराम नाटक की प्रमुख विशेषताओं में विभिन्न धर्मों के कलाकारों की भागीदारी भी रही है। वर्षों से मुस्लिम समुदाय के कलाकार रामायण के अलग-अलग पात्रों की भूमिकाएं निभाते रहे हैं। कई कलाकारों ने राम, लक्ष्मण, रावण, ताड़का और शबरी जैसे किरदार निभाए हैं। कई लोग मंच के पीछे प्रकाश, मंच सज्जा और अन्य व्यवस्थाओं में सहयोग करते रहे हैं। इसी साझी भागीदारी ने श्रीराम नाटक को सामाजिक सौहार्द की मिसाल बनाया है।
पुराना बिलासपुर डूबा, परंपरा जारी
पुराने बिलासपुर के जलमग्न होने के बाद शहर का स्वरूप बदल गया, लेकिन श्रीराम नाटक की परंपरा कायम रही। स्थान और परिस्थितियां बदलीं, लेकिन डियारा में यह आयोजन आगे बढ़ता रहा। 136 वर्ष बाद भी श्रीराम नाटक देखने के लिए शहर के साथ आसपास के क्षेत्रों से लोग पहुंचते हैं। समिति हर वर्ष परंपरा की मूल भावना को कायम रखते हुए मंचन में नए कलाकारों और नए आकर्षणों को जोड़ने का प्रयास करती है।